MP में सोलर रूफटॉप की 11 सालों की कहानी: G1 से G5 तक का सफर (2015 – 2026)
विषय: सोलर टेक्नोलॉजी, वेंडर और कस्टमर का बदलता माइंडसेट मध्य प्रदेश में सोलर ऊर्जा की यात्रा केवल सोलर पैनलों की दक्षता (Efficiency) बढ़ने की कहानी नहीं है। यह कहानी है— वेंडर की बदलती सोच और ग्राहक की बढ़ती समझ की। 2015 में जब मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) ने ग्रिड-कनेक्टेड नेट मीटरिंग रेगुलेशंस जारी किए थे, तब से लेकर आज 2026 तक, रूफटॉप सोलर मार्केट पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 11 सालों में तकनीक, सरकारी नीतियां, वेंडर की कार्यशैली और ग्राहक के सवालों का स्तर इतनी तेज़ी से बदला है कि हम इस पूरे कालखंड को 5 अलग-अलग सोलर जनरेशन्स (Solar Generations) में बाँट सकते हैं। आइए, समझते हैं कि 2015 का सोलर मार्केट आज 2026 में कहाँ पहुँच चुका है। 1. Generation 1: The Pioneers (2015 – 2017) “सोलर बेचना नहीं, पहले सोलर समझाना पड़ता था” यह वह दौर था जब MP में रूफटॉप सोलर और नेट-मीटरिंग बिल्कुल नए शब्द थे। लोग छत पर पैनल लगाने से झिझकते थे और पूरी प्रक्रिया कागज़ी फाइलों में उलझी रहती थी। वेंडर का माइंडसेट: “प्लांट तो लगाना है, लेकिन नेट-मीटर की प्रक्रिया और व्यावहारि...