क्या हम सोलर एनर्जी को 'रोड-छाप' बना रहे हैं? क्वालिटी चुनें, जुगाड़ नहीं!
अक्सर कहा जाता है कि "महंगी चीज़ एक बार रुलाती है, लेकिन सस्ती चीज़ बार-बार रुलाती है।" यह बात आज के समय में सोलर पैनल सिस्टम लगवाने पर बिल्कुल सटीक बैठती है। हाल ही में एक विचारोत्तेजक पोस्टर सामने आया जिसने एक कड़वी सच्चाई को उजागर किया: “अगर डॉक्टर सड़क पर इलाज करने लगें, तो डॉक्टरी की गरिमा खत्म हो जाती है।” ठीक वैसे ही, सोलर सिस्टम सिर्फ छत पर कांच की प्लेटें रख देना नहीं है, यह एक जटिल इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग है। 1. सोलर 'ग्रीन एनर्जी' है या सिर्फ 'कबाड़'? सोलर लगवाना एक 25 साल का निवेश है। लेकिन आज बाजार में कई ऐसे लोग हैं जो बिना किसी तकनीकी ज्ञान या सर्टिफिकेशन के सोलर इंस्टॉलेशन कर रहे हैं। जब आप बिना तकनीकी समझ (Technical Knowledge) के सिर्फ सस्ता होने के कारण सोलर लगवाते हैं, तो वह 'ग्रीन एनर्जी' का स्रोत नहीं, बल्कि आपकी छत पर रखा एक 'कबाड़' बन जाता है। 2. 'जुगाड़' से होने वाले नुकसान भारत में 'जुगाड़' शब्द बहुत लोकप्रिय है, लेकिन सोलर के मामले में यह खतरनाक हो सकता है: सुरक्षा का खतरा: गलत वायरिंग स...