सोलर बिजनेस में 'Enquiry' तो आती है, पर 'Order' क्यों नहीं? जानिए कड़वे सच!
सोलर सेक्टर आज तेज़ी पर है। हर घर की छत पर पैनल लग रहे हैं, लेकिन कई सोलर वेंडर्स और कंपनियों की एक ही शिकायत है— "ग्राहक बात तो करता है, कोटेशन भी लेता है, पर आखिर में ऑर्डर कन्फर्म नहीं करता।" 14 साल के जमीनी अनुभव और मार्केट के उतार-चढ़ाव को देखने के बाद, मैं इसके सबसे बड़े और असली कारण आपके सामने रख रहा हूँ: 1. रेट का मायाजाल: ₹1.80 लाख बनाम ₹2.10 लाख की जंग सबसे बड़ा खेल 'रेट' का है। मान लीजिए, एक बड़ी कंपनी ₹2,10,000 का रेट देती है, वहीं एक छोटा नया वेंडर उसी सिस्टम के लिए ₹1,80,000 मांगता है। सच्चाई: ग्राहक को लगता है कि उसे ₹30,000 की सीधी बचत हो रही है। लेकिन वह यह नहीं देख पाता कि बड़ी कंपनी के पास स्टाफ है, ऑफिस है और एक सिस्टम है जो अगले 5-10 साल तक Service देने के लिए बना है। नतीजा: एक छोटा वेंडर शायद ₹5,000 के मुनाफे पर काम कर ले, लेकिन कल को अगर सर्विस की ज़रूरत पड़ी, तो वह फोन उठाएगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं। सीख: अगर आप बड़ी कंपनी हैं, तो ग्राहक को पैनल नहीं, 'भरोसा और 25 साल की शांति' बेचिए। उसे समझाइए कि...