सोलर ओवरफ्लो: क्या भारत की सौर ऊर्जा बर्बाद हो रही है ?
हाल ही में राजस्थान के भड़ला सोलर पार्क (फलोदी) से जुड़ी एक रिपोर्ट ने सौर ऊर्जा क्षेत्र की एक बड़ी चुनौती को उजागर किया है
भारी नुकसान के आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के एक पखवाड़े में लगभग 47 लाख यूनिट बिजली की 'भ्रूण हत्या' (बर्बादी) हुई है
भारी नुकसान के आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के एक पखवाड़े में लगभग 47 लाख यूनिट बिजली की 'भ्रूण हत्या' (बर्बादी) हुई है
तीन प्रमुख प्लांट्स में बर्बादी का विवरण:
100 मेगावाट प्लांट: 16.19 लाख यूनिट बेकार (लगभग ₹40 लाख का नुकसान)
। 100 मेगावाट प्लांट: 15.50 लाख यूनिट बेकार (लगभग ₹38 लाख का नुकसान)
। 250 मेगावाट प्लांट: 15.50 लाख यूनिट बेकार (लगभग ₹51 लाख का नुकसान)
।
बिजली उत्पादन रोकने के प्रमुख कारण
ग्रिड क्षमता की कमी: ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त नहीं होने के कारण अतिरिक्त बिजली की सप्लाई नहीं हो पाई
। स्टोरेज सिस्टम का अभाव: उत्पादित बिजली को स्टोर करने के लिए पर्याप्त मैकेनिज्म विकसित नहीं है
। डिमांड-सप्लाई असंतुलन: दिन के समय जब उत्पादन चरम पर होता है, तब ग्रिड में बिजली की मांग कम रहती है
। लोड मैनेजमेंट की कमजोरी: डिस्कॉम स्तर पर प्रभावी लोड बैलेंसिंग नहीं हो पा रही है
।
भविष्य की राह: क्या है समाधान?
विशेषज्ञों और रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट से बचने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने जरूरी हैं:
बैटरी स्टोरेज सिस्टम: बड़े स्तर पर ऊर्जा भंडारण प्रोजेक्ट्स पर काम करना
। ग्रिड मजबूती: नई ट्रांसमिशन लाइनें बिछाना और इंटर-स्टेट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना
। टाइम-ऑफ-डे टैरिफ: उद्योगों को दिन के समय (जब सौर ऊर्जा अधिक हो) बिजली उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना
। ग्रीन हाइड्रोजन: अतिरिक्त बिजली का उपयोग ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन जैसे विकल्पों में करना
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निष्कर्ष:
सस्ती सौर बिजली उपलब्ध होने के बावजूद उपभोक्ता तक न पहुंच पाना एक बड़ी चिंता है
प्रस्तुति: सोलर ऊर्जा जागरूकता (SEAC)
स्रोत: पत्रिका समाचार रिपोर्ट
www.seac.in
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