"सोलर पैनल का जादुई सफर: 12% से 23% एफिशिएंसी तक कैसे बदली बिजली की दुनिया?"
आज से कुछ साल पहले जब हम सोलर पैनल देखते थे, तो वे सिर्फ एक नीले रंग के कांच के टुकड़े लगते थे जो बहुत कम बिजली बनाते थे। तब 12-13% एफिशिएंसी एक मानक (Standard) थी। लेकिन आज, TOPCon और HJT जैसी तकनीकों ने इसे 23% के पार पहुँचा दिया है। इसका मतलब है कि आज का एक पैनल, पुराने दो पैनल्स के बराबर बिजली पैदा कर रहा है। आइए जानते हैं इस अद्भुत बदलाव के पीछे की कहानी... सोलर इंडस्ट्री में पिछले एक-डेढ़ दशक में जो बदलाव आया है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। अगर हम पीछे मुड़कर देखें, तो एक समय था जब 75Wp का सोलर मॉड्यूल आकार में इतना बड़ा होता था कि आज उतने ही बड़े साइज में 250W-300Wp के मॉड्यूल आसानी से आ जाते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण था— एफिशिएंसी (Efficiency) यानी बिजली बनाने की क्षमता। शुरुआत में सेल्स की एफिशिएंसी बहुत कम थी, इसलिए ज्यादा बिजली बनाने के लिए बहुत बड़े एरिया की जरूरत पड़ती थी। लेकिन आज टेक्नोलॉजी ने पूरी तस्वीर बदल दी है। आइए समझते हैं इस 'सोलर क्रांति' के मुख्य पड़ावों को: 1. पॉली (Poly) से मोनो (Mono) और PERC तक का सफर शुरुआत में पॉलीक्रिस्टलाइन (...