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दुकान नहीं, कंपनी चलाओ: क्या आपकी 'हरकतें' आपके बिजनेस को छोटा रख रही हैं?

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आज के दौर में हर दूसरा व्यक्ति स्टार्टअप या अपना बिजनेस शुरू कर रहा है। सपना सबका एक ही होता है—एक बड़ी कंपनी खड़ी करना। लेकिन हकीकत यह है कि बहुत से बिजनेस ओनर सालों बाद भी वहीं खड़े रहते हैं जहाँ से उन्होंने शुरू किया था। ​इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि उन्हें 'दुकान' (Shop) और 'कंपनी' (Company) के बीच का बुनियादी फर्क ही नहीं पता होता। आपकी रोजमर्रा की आदतें और काम करने का तरीका ही यह तय करता है कि आप एक दुकानदार हैं या एक कंपनी के विजनरी ओनर। ​दुकान बनाम कंपनी: मानसिकता का अंतर ​अगर आप एक बिजनेस ओनर हैं, तो ईमानदारी से इन बिंदुओं पर गौर करें: ​ निर्भरता (Dependency): अगर आपके ऑफिस न जाने पर काम रुक जाता है या क्लाइंट सिर्फ आपसे ही बात करना चाहता है, तो आप 'दुकान' चला रहे हैं। कंपनी वह है जो 'सिस्टम' और 'प्रोसेस' पर चलती है, व्यक्ति पर नहीं। ​ जुगाड़ बनाम सिस्टम: दुकानदार हमेशा 'जुगाड़' ढूंढता है, जबकि एक कंपनी ओनर SOP (Standard Operating Procedure) बनाता है ताकि उसके बिना भी काम की क्वालिटी न गिरे। ​ आज का गल्ला बनाम क...