संदेश

Solar लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्यों गिरती जा रही है सोलर इंडस्ट्री की वैल्यू? एक गंभीर सोच और ज़मीनी हकीकत

चित्र
एक वक्त था जब समाज में 'सोलर' का नाम लेते ही लोगों के दिमाग में एक उच्च तकनीकी (High-Tech) और प्रतिष्ठित पहचान उभरती थी। अगर कोई कहता था कि वह सोलर क्षेत्र में काम करता है, तो उसे एक सम्मानित और एक्सपर्ट इंजीनियर या विजनरी प्रोफेशनल के रूप में देखा जाता था। लेकिन आज की कड़वी सच्चाई यह है कि यह पूरी इंडस्ट्री "भटा-भाजी" के भाव बिकने लगी है। ​जिस टेक्नोलॉजी को देश के ऊर्जा भविष्य का आधार बनना था, वह आज केवल एक सस्ता सामान बेचने का जरिया बनकर रह गई है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि इस बेहतरीन तकनीक का स्तर इतना गिर गया? आइए, इस चिंताजनक बदलाव के कुछ मुख्य पहलुओं पर नज़र डालते हैं: ​1. बिना टेक्निकल नॉलेज के बनते 'सोलर वेंडर' ​अगर इतिहास उठाकर देखें, तो एक ज़माना था जब हर दूसरा बेरोजगार व्यक्ति एलआईसी एजेंट बन जाता था। कुछ सालों बाद दौर बदला, तो लोग प्रॉपर्टी ब्रोकर और बिल्डर बनने की होड़ में लग गए। आज ठीक वही हाल सोलर इंडस्ट्री का हो चुका है। ​जिस व्यक्ति को यह भी नहीं पता कि स्ट्रिंग डिजाइनिंग क्या होती है, स्ट्रक्चर की मजबूती (DC & AC Safety) का क्या...

सावधान! सोलर लगवाने जा रहे हैं? कहीं आप भी इस बड़े 'फ्रॉड' का शिकार तो नहीं हो रहे?

चित्र
आज के समय में बिजली के बढ़ते बिलों से राहत पाने के लिए हर कोई सोलर पैनल की ओर रुख कर रहा है। सरकार की PM Surya Ghar Yojana ने इसे और भी लोकप्रिय बना दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी बढ़ती मांग के साथ सोलर मार्केट में धोखाधड़ी (Fraud) भी चरम पर है? ​एक छोटी सी गलती आपके हजारों रुपए बर्बाद कर सकती है। आइए जानते हैं आज के समय में सोलर इंडस्ट्री के सबसे बड़े फ्रॉड्स और उनसे बचने के तरीके। ​ 1. PM Surya Ghar के नाम पर फर्जी वेबसाइट्स ​आजकल गूगल पर सरकार की आधिकारिक वेबसाइट जैसी दिखने वाली कई फर्जी साइट्स तैर रही हैं। ​ धोखा: ये साइट्स आपसे रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर ₹500 से ₹2000 तक वसूल लेती हैं। ​ बचाव: याद रखें, सरकार की केवल एक ही आधिकारिक वेबसाइट है: pmsuryaghar.gov.in । इसके अलावा किसी भी साइट पर पैसे न दें। ​ 2. 'B-Grade' और पुराने पैनल्स का खेल ​मार्केट में कई ऐसे वेंडर सक्रिय हैं जो नामी कंपनियों के स्टिकर लगाकर पुराने या रिजेक्टेड (B-Grade) पैनल बेच रहे हैं। ​ धोखा: आपको लगता है कि आपने लेटेस्ट तकनीक ली है, लेकिन वो पैनल 2-3 साल में ही बिजली ब...

सोलर लगवाया लेकिन बिजली नहीं बन रही? आज ही जांच करें ये 6 मुख्य कारण!

चित्र
सोलर पैनल लगवाना एक बड़ा निवेश है, और जब महीने के अंत में बिजली बिल में कटौती नहीं दिखती, तो चिंता होना स्वाभाविक है। कई बार समस्या बहुत छोटी होती है जिसे हम नजरअंदाज कर देते हैं। अगर आपका सोलर सिस्टम उम्मीद के मुताबिक बिजली (Generation) नहीं बना रहा है, तो मैकेनिक को बुलाने से पहले इन 6 बिंदुओं की जांच खुद जरूर करें। ​ 1. सोलर पैनल्स की सफाई (Cleaning) ​पैनल्स पर जमी धूल, मिट्टी या चिड़ियों की बीट सूरज की रोशनी को सेल्स तक पहुँचने से रोकती है। ​ चेक करें: क्या पैनल्स पर धूल की सफेद परत जमी है? ​ समाधान: पैनल्स को हमेशा सुबह जल्दी या शाम को साफ पानी से धोएं। दोपहर की तेज धूप में गर्म पैनल्स पर पानी न डालें, इससे कांच चटक सकता है। ​ 2. छाया का प्रभाव (Shadow Analysis) ​सोलर सिस्टम के लिए 'छाया' सबसे बड़ी दुश्मन है। यदि आपके पैनल के किसी छोटे से हिस्से पर भी पेड़ की टहनी, बिजली के तार या पानी की टंकी की परछाई पड़ रही है, तो पूरे स्ट्रिंग का करंट कम हो जाता है। ​ चेक करें: सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच देखें कि क्या कोई परछाई पैनल्स पर आ रही है? ​ 3. ...

🏠 अपने घर के लिए सही सोलर सिस्टम का चुनाव

चित्र
सोलर पैनल लगवाना न केवल बिजली बिल कम करता है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अच्छा है। अपना सफर शुरू करने के लिए इन 5 स्टेप्स को समझें: ​ 1. अपनी बिजली की खपत (Load) को समझें ​सबसे पहले अपने पिछले 6 से 12 महीनों के बिजली बिल देखें। यह देखें कि आप औसतन हर महीने कितनी यूनिट (kWh) खर्च करते हैं। ​ थंब रूल: यदि आपका मासिक बिल लगभग 300 यूनिट है, तो आपको 3kW के सिस्टम की जरूरत होगी। आमतौर पर 1kW का सिस्टम दिन भर में 4-5 यूनिट बिजली बनाता है। ​ 2. सोलर सिस्टम के प्रकार का चुनाव करें ​मार्केट में मुख्य रूप से तीन तरह के सिस्टम होते हैं: ​ On-Grid (ऑन-ग्रिड): यह सरकारी ग्रिड से जुड़ा होता है। इसमें बैटरी नहीं होती। अगर आपके इलाके में बिजली कटौती कम होती है, तो यह सबसे सस्ता और बेस्ट विकल्प है। इसमें Net Metering का फायदा मिलता है। ​ Off-Grid (ऑफ-ग्रिड): इसमें बैटरी बैकअप होता है। जहाँ बिजली बहुत ज्यादा कटती है, वहाँ यह सही है। ​ Hybrid (हाइब्रिड): इसमें ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड दोनों के फायदे मिलते हैं (बैटरी + ग्रिड)। यह थोड़ा महंगा होता है। ​ 3. सोलर पैनल की तकनीक (Mono vs...

सोलर लगवा रहे हैं तो ये बातें जरूर ध्यान रखें

चित्र
नमस्ते दोस्तों, मैं कृष्णा (Solar Charcha with Krishna) । सोलर इंडस्ट्री में आजकल 'सस्ते' का जो खेल चल रहा है, उसमें सबसे बड़ा नुकसान ग्राहक का हो रहा है। लोग 5-10 हज़ार बचाने के चक्कर में 25-30 साल का भरोसा खो रहे हैं। ​आज मैं आपको वो 5 बातें बताऊंगा जो कोई 'सस्ता वेंडर' आपको कभी नहीं बताएगा, लेकिन मेरा प्रयास है  कि आपको सही जानकारी मिले। ​ शायरी का संदेश ​ "सस्ते के मोह में अक्सर बुनियाद कच्ची रह जाती है, धूप तो आती है मगर बिजली कम बन पाती है। सावधानी और जानकारी ज़रूरी है सोलर लेते समय, वरना समझदारी धरी की धरी रह जाती है।" ​ सोलर प्रपोजल चेक करने की 'सॉलिड' चेकलिस्ट: ​ 1. मॉड्यूल की 30 साल की वारंटी (Solar Module: 30 Years Warranty) ​आजकल मार्केट में N-Type TOPCon जैसी लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के साथ 30 साल की परफॉरमेंस वारंटी उपलब्ध है। अगर आपका वेंडर अभी भी पुराने 25 साल वाले पैनल दे रहा है, तो आप पीछे छूट रहे हैं। सुनिश्चित करें कि आपको लेटेस्ट मॉड्यूल और लंबी वारंटी मिल रही है। ​ 2. स्ट्रक्चर की वारंटी: सिर्फ लोहा नहीं, भरोस...

सावधान: सोलर सब्सिडी बिजली विभाग (DISCOM) नहीं, नेशनल पोर्टल से आएगी!

चित्र
सोलर पैनल लगवाने के बाद अक्सर उपभोक्ता सब्सिडी के लिए बिजली विभाग (DISCOM) के चक्कर काटते हैं। लोगों को लगता है कि चूंकि बिजली का बिल डिस्कॉम से आता है, तो सब्सिडी भी वही देंगे। लेकिन असलियत कुछ और है। ​अगर आप सोलर लगवाने जा रहे हैं, तो इन 3 मुख्य बातों को गांठ बांध लें: ​1. सब्सिडी का स्रोत: 'नेशनल पोर्टल' (National Portal) ​अब सब्सिडी की पूरी प्रक्रिया National Portal for Rooftop Solar के जरिए होती है। डिस्कॉम का काम केवल आपके सिस्टम का तकनीकी निरीक्षण (Inspection) और नेट-मीटरिंग (Net-metering) करना है। सब्सिडी का पैसा सीधे भारत सरकार के पोर्टल से आपके खाते में (DBT के जरिए) आता है। इसमें स्टेट डिस्कॉम की वित्तीय भूमिका नहीं होती। ​2. रजिस्टर्ड वेंडर से ही काम क्यों करवाएं? ​सब्सिडी का पूरा खेल 'डाटा मैचिंग' पर टिका है। केवल रजिस्टर वेंडर (Empaneled Vendor) ही नेशनल पोर्टल पर आपके प्रोजेक्ट की सही जानकारी अपलोड कर सकता है। अगर आप किसी नॉन-रजिस्टर वेंडर से काम करवाते हैं, तो आपका आवेदन पोर्टल पर स्वीकार ही नहीं होगा और सब्सिडी रुक जाएगी। ​3. अगर सब्...

क्या आप हर बार 'जीरो' से शुरू करने के लिए तैयार हैं? एक करियर की कहानी

चित्र
  अक्सर हमारे आसपास ऐसे लोग होते हैं जो एक काम शुरू करते हैं, और जैसे ही उसमें थोड़ी मेहनत या बोरियत आती है, उसे छोड़कर किसी दूसरी फील्ड में भाग जाते हैं। आज मैं आपको दो दोस्तों की कहानी सुनाता हूँ, जो शायद आपकी सोच बदल दे। दो दोस्तों की कहानी: रवि और सोहन आज से 12 साल पहले रवि और सोहन ने एक साथ सोलर इंडस्ट्री (Solar Industry) में अपना करियर शुरू किया। दोनों होनहार थे, लेकिन दोनों की सोच अलग थी।  * शुरुआत (0-3 साल): दोनों ने जमकर धूप में इंस्टॉलेशन का काम सीखा। रवि को लगा कि मेहनत ज्यादा है और तरक्की धीरे। उसने सुना कि प्रॉपर्टी (Real Estate) में बहुत मोटा कमीशन है। उसने सोलर छोड़ दिया और प्रॉपर्टी का काम शुरू कर दिया। सोहन टिका रहा और उसने सर्विस इंजीनियरिंग की बारीकियां सीखीं।   * मध्य सफर (4-8 साल): प्रॉपर्टी मार्केट में मंदी आई, तो रवि परेशान हो गया। उसने सोचा, "चलो बैंक में लोन एजेंट बन जाते हैं, वहां ऑफिस में बैठना होगा।" रवि फिर से जीरो पर आ गया। उधर सोहन ने सोलर में 3D डिजाइनिंग और कंसल्टेंसी सीख ली। अब उसे धूप में नहीं बैठना पड़ता था, लोग उसकी सलाह के पैसे देते थे।...

100kW solar On-Grid system designing

चित्र
 

70kW solar on grid system design

चित्र
    For video Please visit on - YouTube channel - Solar Charcha with krishna 

50kw solar on grid system design by krishna shrivastava

चित्र
 

30kw solar on grid system design by krishna shrivastava

चित्र
 

Solar Orientation

चित्र
  For Lecture visit on - Solar orientation in Hindi

25kw solar ongrid system design by krishna shrivastava

चित्र
 Hello friend i have started podcast on Solar On-Grid system designing on YouTube channel "SOLAR CHARCHA WITH KRISHNA"  Episode-7= 25kw system design  Visit on Youtube channel -  25kw solar ongrid system design