क्या आप हर बार 'जीरो' से शुरू करने के लिए तैयार हैं? एक करियर की कहानी

 अक्सर हमारे आसपास ऐसे लोग होते हैं जो एक काम शुरू करते हैं, और जैसे ही उसमें थोड़ी मेहनत या बोरियत आती है, उसे छोड़कर किसी दूसरी फील्ड में भाग जाते हैं। आज मैं आपको दो दोस्तों की कहानी सुनाता हूँ, जो शायद आपकी सोच बदल दे।

दो दोस्तों की कहानी: रवि और सोहन



आज से 12 साल पहले रवि और सोहन ने एक साथ सोलर इंडस्ट्री (Solar Industry) में अपना करियर शुरू किया। दोनों होनहार थे, लेकिन दोनों की सोच अलग थी।

 * शुरुआत (0-3 साल): दोनों ने जमकर धूप में इंस्टॉलेशन का काम सीखा। रवि को लगा कि मेहनत ज्यादा है और तरक्की धीरे। उसने सुना कि प्रॉपर्टी (Real Estate) में बहुत मोटा कमीशन है। उसने सोलर छोड़ दिया और प्रॉपर्टी का काम शुरू कर दिया। सोहन टिका रहा और उसने सर्विस इंजीनियरिंग की बारीकियां सीखीं।

 * मध्य सफर (4-8 साल): प्रॉपर्टी मार्केट में मंदी आई, तो रवि परेशान हो गया। उसने सोचा, "चलो बैंक में लोन एजेंट बन जाते हैं, वहां ऑफिस में बैठना होगा।" रवि फिर से जीरो पर आ गया। उधर सोहन ने सोलर में 3D डिजाइनिंग और कंसल्टेंसी सीख ली। अब उसे धूप में नहीं बैठना पड़ता था, लोग उसकी सलाह के पैसे देते थे।

 * आज का दिन (12 साल बाद): रवि आज एक किराने की दुकान चला रहा है। उसने पिछले 12 सालों में 5 बार फील्ड बदली। आज भी वह हर काम में एक 'फ्रेशर' (Fresher) की तरह ही है। वहीं सोहन आज एक सीनियर कंसल्टेंट और ट्रेनर है। उसके पास 12 साल का वो 'इंसाइडर नॉलेज' है जो किसी किताब में नहीं मिलता।



असली समस्या: 'करियर हॉपिंग' का नुकसान

जब आप अपनी वर्किंग फील्ड बार-बार बदलते हैं, तो आप सिर्फ नौकरी नहीं बदलते, बल्कि अपनी पिछली सारी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। इसके 3 बड़े नुकसान होते हैं:

 * जीरो रीसेट (Zero Reset): 5 साल सोलर में काम करने के बाद अगर आप बैंक में जाते हैं, तो आपकी वो 5 साल की वैल्यू बैंक के लिए जीरो है। आप वहां फिर से सबसे कम सैलरी पर शुरू करते हैं।

 * नेटवर्क का खत्म होना: एक ही फील्ड में रहने से 10-12 साल में आपकी एक पहचान (Reputation) बनती है। फील्ड बदलते ही आप गुमनाम हो जाते हैं।

 * मास्टरी की कमी: दुनिया 'Expert' को पैसा देती है, 'All-rounder' को नहीं। जो हर काम थोड़ा-थोड़ा जानता है, उसे कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं मिलता।

मेरा 12 साल का अनुभव क्या कहता है?

मैंने खुद पिछले 12 सालों में एक तकनीशियन से लेकर, इंस्टॉलर, डिजाइनर, कंसल्टेंट और अब एक ट्रेनर तक का सफर तय किया है। मैंने फील्ड नहीं बदली, मैंने अपनी स्किल्स (Skills) को अपग्रेड किया।

 "जमीन में 10 अलग-अलग जगह 10-10 फुट गड्ढे खोदने से पानी नहीं मिलता, एक ही जगह पर 100 फुट गहरा गड्ढा खोदने से मिलता है।"

अगर आप सोलर में हैं, इंजीनियरिंग में हैं या किसी भी हुनर में हैं—तो उसमें टिके रहिये। मुश्किलें हर जगह आएँगी, लेकिन जो टिका रहेगा, वही अंत में 'Expert' बनकर उभरेगा।

निष्कर्ष:

अगली बार जब आपका मन काम बदलने का करे, तो खुद से पूछना—क्या मैं फिर से जीरो से शुरू करने के लिए तैयार हूँ? या मैं अपनी इसी फील्ड में और गहराई तक जाकर 'लीडर' बनना चाहता हूँ?

चुनाव आपका है!


Krishna Shrivastava 

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