सावधान: सोलर सब्सिडी बिजली विभाग (DISCOM) नहीं, नेशनल पोर्टल से आएगी!
सोलर पैनल लगवाने के बाद अक्सर उपभोक्ता सब्सिडी के लिए बिजली विभाग (DISCOM) के चक्कर काटते हैं। लोगों को लगता है कि चूंकि बिजली का बिल डिस्कॉम से आता है, तो सब्सिडी भी वही देंगे। लेकिन असलियत कुछ और है।
अगर आप सोलर लगवाने जा रहे हैं, तो इन 3 मुख्य बातों को गांठ बांध लें:
1. सब्सिडी का स्रोत: 'नेशनल पोर्टल' (National Portal)
अब सब्सिडी की पूरी प्रक्रिया National Portal for Rooftop Solar के जरिए होती है। डिस्कॉम का काम केवल आपके सिस्टम का तकनीकी निरीक्षण (Inspection) और नेट-मीटरिंग (Net-metering) करना है। सब्सिडी का पैसा सीधे भारत सरकार के पोर्टल से आपके खाते में (DBT के जरिए) आता है। इसमें स्टेट डिस्कॉम की वित्तीय भूमिका नहीं होती।
2. रजिस्टर्ड वेंडर से ही काम क्यों करवाएं?
सब्सिडी का पूरा खेल 'डाटा मैचिंग' पर टिका है। केवल रजिस्टर वेंडर (Empaneled Vendor) ही नेशनल पोर्टल पर आपके प्रोजेक्ट की सही जानकारी अपलोड कर सकता है। अगर आप किसी नॉन-रजिस्टर वेंडर से काम करवाते हैं, तो आपका आवेदन पोर्टल पर स्वीकार ही नहीं होगा और सब्सिडी रुक जाएगी।
3. अगर सब्सिडी नहीं आ रही, तो कारण क्या हैं?
अगर आपके सोलर सिस्टम को लगे समय हो गया है और पैसा नहीं आया, तो डिस्कॉम ऑफिस जाने के बजाय नेशनल पोर्टल पर अपना स्टेटस चेक करें। इसके मुख्य कारण ये हो सकते हैं:
- डॉक्यूमेंट मिसमैच (Document Mismatch): आपके बिजली बिल, आधार कार्ड और बैंक पासबुक में नाम की स्पेलिंग अलग होना।
- इंस्पेक्शन पेंडिंग (Inspection Pending): पोर्टल पर डिस्कॉम की तरफ से इंस्पेक्शन रिपोर्ट अपडेट न होना।
- गलत बैंक विवरण: पोर्टल पर अपलोड की गई बैंक की जानकारी या कैंसिल्ड चेक में गलती होना।
सोलर सब्सिडी चेकलिस्ट: आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
नेशनल पोर्टल पर सब्सिडी आवेदन करने से पहले सुनिश्चित करें कि आपके पास ये सभी चीजें तैयार और सही हैं:
- नाम का मिलान (Name Matching): सबसे जरूरी बात! आपके बिजली बिल (Electricity Bill), बैंक पासबुक (Bank Passbook) और आधार कार्ड पर नाम की स्पेलिंग बिल्कुल एक जैसी होनी चाहिए। अगर इनमें जरा भी फर्क है, तो पोर्टल उसे रिजेक्ट कर सकता है।
- रजिस्टर्ड वेंडर का चुनाव: सोलर लगवाने के लिए केवल उन्हीं वेंडर को चुनें जो नेशनल पोर्टल पर लिस्टेड (Empaneled) हैं। बिना रजिस्ट्रेशन वाले वेंडर से काम करवाने पर सब्सिडी का दावा नहीं किया जा सकता।
- बैंक खाते का विवरण: पोर्टल पर वही बैंक खाता दें जो आपके आधार से लिंक हो। कैंसिल चेक (Cancelled Cheque) की फोटो साफ होनी चाहिए जिसमें आपका नाम और IFSC कोड स्पष्ट दिखे।
- इंस्पेक्शन स्टेटस: नेट-मीटर लगने के बाद अपने वेंडर से संपर्क करें और सुनिश्चित करें कि डिस्कॉम (DISCOM) ने पोर्टल पर 'Inspection Report' सबमिट कर दी है। इसके बिना सब्सिडी आगे नहीं बढ़ेगी।
- फोटो अपलोड: प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद सोलर सिस्टम के साथ अपनी फोटो पोर्टल पर अपलोड करना न भूलें (यह काम आमतौर पर वेंडर की मदद से पोर्टल पर होता है)।
एक जरूरी सलाह:
अगर आपकी सब्सिडी रुकी हुई है, तो बिजली विभाग के दफ्तर जाने के बजाय सबसे पहले अपना नेशनल पोर्टल लॉगिन चेक करें। वहां आपको 'Remarks' सेक्शन में साफ पता चल जाएगा कि डॉक्यूमेंट में क्या कमी है या इंस्पेक्शन कहाँ अटका है।
निष्कर्ष:
सब्सिडी रुकने का मतलब यह नहीं है कि सरकार पैसा नहीं देना चाहती, बल्कि इसका मतलब है कि आपके डॉक्यूमेंटेशन में कोई तकनीकी कमी है। हमेशा नेशनल पोर्टल पर अपना लॉगिन चेक करते रहें और केवल अधिकृत वेंडर के माध्यम से ही फाइल प्रोसेस करवाएं।
Er. Krishankant
(NSDC & NCVT CERTIFIED)
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