सोलर पैनल की दो टेबल या Rows के बीच सही दूरी (InterRow Spacing)
सोलर पावर प्लांट लगाते समय सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि दो सोलर पैनल की लाइनों के बीच कितनी जगह छोड़ी जाए। अगर यह दूरी कम रह जाए, तो आगे वाली लाइन की परछाई (Shadow) पीछे वाली लाइन पर पड़ती है, जिससे बिजली का उत्पादन (Generation) बहुत कम हो जाता है।
यहाँ हम दिए गए उदाहरण के अनुसार गणना करना सीखेंगे:
सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि सोलर मॉड्यूल का पिछला हिस्सा ज़मीन या स्ट्रक्चर से कितना ऊँचा है।
फॉर्मूला:
उदाहरण: यदि मॉड्यूल की लंबाई 10 फीट है और टिल्ट एंगल है:
2. बेसिक पैनल स्पेसिंग (D)
यह दूरी सूर्य के एल्टीट्यूड एंगल (Altitude Angle) पर निर्भर करती है।
फॉर्मूला: D = h/ Tan(altitude Angle)
उदाहरण (13 अगस्त, सुबह 11:00 बजे के लिए):
एल्टीट्यूड एंगल (alpha) = 70.36°
tan(70.36°) = 2.802
D = 5/2.802 = 1.78 फीट
3. एडवांस्ड स्पेसिंग (d) - अज़ीमुथ एंगल के साथ
सूरज हमेशा सीधा नहीं होता, इसलिए हमें अज़ीमुथ एंगल (Azimuth Angle) को भी ध्यान में रखना चाहिए ताकि पूरे दिन छाया न पड़े।
फॉर्मूला: d = D + [D*cos(180 - Azimuth Angle)]
निष्कर्ष
सोलर सिस्टम को शैडो-फ्री (Shadow-free) रखने के लिए सिर्फ अंदाज़ा न लगाएं, इन फ़ार्मुलों का उपयोग करें।
अधिक जानकारी के लिए मेरा यह वीडियो देखें:
सोलर चर्चा विथ कृष्णा (Solar Charcha with Krishna)
Krishna.23apr@gmail.com
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