सोलर अर्थिंग का बड़ा फ्रॉड: 3 महीने में जंग लगने वाली नकली कॉपर रॉड और 50mm GI पाइप का पूरा सच!

नमस्कार दोस्तों, सोलर चर्चा विद कृष्णा में आपका स्वागत है।

​जब भी आप अपने घर पर सोलर प्लांट लगवाते हैं, तो वेंडर आपको बड़े-बड़े दावों के साथ अर्थिंग किट दिखाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोलर प्लांट की 25 साल की जिंदगी को सुरक्षित रखने वाली इसी अर्थिंग में आजकल मार्केट का सबसे बड़ा खेल (Fraud) चल रहा है?


​आज हम ग्राउंड रियलिटी के साथ समझेंगे कि असली कॉपर बॉन्डेड रॉड, नकली कॉपर-पॉलिश्ड रॉड और 50mm GI केमिकल इलेक्ट्रोड में क्या अंतर है, और वेंडर कैसे आपको बेवकूफ बनाते हैं।

​1. तीन प्रकार की अर्थिंग: ताकत और कमजोरी (The Comparison)

​मार्केट में मुख्य रूप से तीन तरह के विकल्प दिए जाते हैं। आइए पहले इनकी ताकत और कमजोरी को समझें:

​अ

A. असली कॉपर बॉन्डेड रॉड (The Real Champ)

  • क्या है यह? यह एक ठोस (Solid) हाई-कार्बन स्टील रॉड होती है, जिसके ऊपर इलेक्ट्रोलाइटिक प्रोसेस से शुद्ध तांबे (Copper) की 250 माइक्रोन (0.25 mm) मोटी परत चढ़ाई जाती है।
  • ताकत: स्टील इसे जमीन में ठोकने के लिए गजब की मजबूती देता है और कॉपर इसे 15-20 साल तक जंग से बचाता है। यह फॉल्ट करंट को सबसे तेजी से जमीन में डालती है।

​B. नकली कॉपर बॉन्डेड/कोटेड रॉड (The Biggest Fraud)

  • क्या है यह? यह साधारण लोहे का सरिया (रॉड) होता है, जिसके ऊपर महज 10 से 15 माइक्रोन तांबे का पानी (Flash Plating या पॉलिश) चढ़ा दिया जाता है।
  • कमजोरी: यह दिखने में हूबहू असली जैसी चमकती है, लेकिन जमीन में गाड़ते समय ही इसकी पॉलिश छिल जाती है। 3-4 महीने गीली मिट्टी में रहने पर इसका तांबा गायब हो जाता है और अंदर का लोहा सड़ने लगता है, जिससे लाल-भूरा जंग बाहर आ जाता है।

​C. 50mm GI केमिकल इलेक्ट्रोड (The Marketing Gimmick)

  • क्या है यह? यह लोहे की एक खोखली (Hollow) पाइप होती है जिस पर जिंक की कोटिंग (GI) होती है और अंदर बेंटोनाइट केमिकल भरा होता है।
  • कमजोरी: वेंडर कहते हैं कि "इसमें अंदर-बाहर दोनों तरफ केमिकल सपोर्ट है।" लेकिन सच यह है कि करंट हमेशा पाइप की बाहरी सतह से जमीन में जाता है। जैसे ही 3-4 साल में बाहर का लोहा जंग खाकर ब्लॉक हो जाता है, अंदर भरा केमिकल अंदर ही बंद रह जाता है और अर्थिंग फेल हो जाती है।

​2. असली और नकली कॉपर बॉन्डेड रॉड की जांच कैसे करें? (How to Test)

​चूंकि नकली रॉड पर भी चुंबक (Magnet) चिपकता है क्योंकि अंदर लोहा होता है, इसलिए सिर्फ मैग्नेट टेस्ट से असली-नकली का पता नहीं लगाया जा सकता। अपनी अर्थिंग को जांचने के लिए ये 4 प्रैक्टिकल तरीके अपनाएं:

​टेस्ट 1: स्क्रैच टेस्ट (The Scratch Test)

​एक रेती (File) या तेज चाकू लें और रॉड की ऊपरी सतह को जोर से खुरचें या घिसें।

  • नकली रॉड: 2-3 बार घिसते ही तांबे की चमकीली परत हट जाएगी और नीचे से तुरंत काला या भूरा लोहा साफ दिखने लगेगा।
  • असली रॉड: घिसने के बाद भी अंदर गहरा लाल/सुनहरा तांबा ही निकलता रहेगा, क्योंकि 250 माइक्रोन की परत काफी मोटी होती है।

​टेस्ट 2: बेंड टेस्ट (The Bend Test)

​रॉड को किसी भारी चीज के बीच फंसाकर या हथौड़े से मारकर मोड़ने (Bend करने) की कोशिश करें।

  • नकली रॉड: मुड़ने वाली जगह से तांबे की कोटिंग पपड़ी (Flakes) बनकर उखड़ने लगेगी या चटक जाएगी।
  • असली रॉड: यह मुड़ जाएगी, लेकिन इसकी कॉपर की परत स्टील के साथ आणविक (Molecular) रूप से जुड़ी होती है, इसलिए यह पपड़ी बनकर कभी नहीं छूटेगी।

​टेस्ट 3: वजन और मोटाई का अनुपात

  • ​असली कॉपर बॉन्डेड रॉड (जैसे 17.2mm मोटाई और 3 मीटर लंबाई) का वजन स्टैंडर्ड इंटरनेशनल गाइडलाइंस के मुताबिक भारी और ठोस होता है। अगर कोई आपको हल्की या पतली रॉड कॉपर बॉन्डेड कहकर दे रहा है, तो सतर्क हो जाएं।

​टेस्ट 4: टेस्ट सर्टिफिकेट (The Ultimate Proof)

​सबसे आसान और कानूनी तरीका—अपने वेंडर से अर्थिंग रॉड का CPRI (Central Power Research Institute) या UL (Underwriters Laboratories) सर्टिफिकेट और उसकी डेटाशीट मांगें। असली मैन्युफैक्चरर हमेशा अपनी रॉड पर 250 माइक्रोन की गारंटी का सर्टिफिकेट देता है।

​3. आपके लिए क्या सही है? (Final Verdict)

​यदि वेंडर आपको सस्ते प्लांट के चक्कर में नकली कॉपर-पॉलिश्ड रॉड दे रहा है (जो 3 महीने में काली और लाल होकर सड़ जाती है), तो उससे लाख गुना बेहतर है कि आप 50mm की GI पाइप ही लगा लें, क्योंकि वह कम से कम 3-4 साल तो टिकेगी!

​लेकिन, यदि आप अपने सोलर प्लांट को पूरे 25 साल के लिए सुरक्षित करना चाहते हैं, तो हमेशा 250 माइक्रोन वाली असली कॉपर बॉन्डेड सॉलिड रॉड ही चुनें और ऊपर बताए गए तरीकों से उसकी जांच जरूर करें।

​याद रखें, अर्थिंग में बचाया गया ₹2000 का लालच, भविष्य में आपके लाखों के सोलर इन्वर्टर और घर के उपकरणों को फूंक सकता है!

सुरक्षित रहें, सही चुनें!

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Er. Krishankant (सौर दीक्षक)

www.seac.in

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