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सोलर नेट मीटरिंग और ग्रॉस मीटरिंग: क्या है आपके लिए सही?

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सोलर एनर्जी की दुनिया में कदम रखते समय दो शब्द सबसे ज्यादा सुनने को मिलते हैं: नेट मीटरिंग (Net Metering) और ग्रॉस मीटरिंग (Gross Metering) । ये दोनों ही बिजली के बिल और सोलर से होने वाली बचत को तय करने के तरीके हैं। आइए जानते हैं इनमें क्या अंतर है। ​1. नेट मीटरिंग (Net Metering) क्या है? ​नेट मीटरिंग में आपके घर या ऑफिस में लगे सोलर पैनल से बनने वाली बिजली का सबसे पहले उपयोग आपके खुद के उपकरणों के लिए होता है। अगर सोलर से जरूरत से ज्यादा बिजली बन रही है, तो वह 'ग्रिड' (सरकारी बिजली लाइन) में चली जाती है। ​ कैसे काम करता है: इसमें एक 'बाय-डायरेक्शनल' (Bi-directional) मीटर लगाया जाता है। यह मीटर मापता है कि आपने ग्रिड से कितनी बिजली ली और कितनी वापस भेजी। ​ बिल का हिसाब: महीने के अंत में आपको केवल उस 'नेट' बिजली का भुगतान करना होता है जो आपने ग्रिड से ली है (कुल ली गई यूनिट-कुल भेजी गई यूनिट)। ​ फायदा: यह उपभोक्ताओं के लिए सबसे फायदेमंद है क्योंकि इससे बिजली का बिल सीधे तौर पर कम या जीरो हो जाता है। ​2. ग्रॉस मीटरिंग (Gross Metering) क्या...