सोलर पैनल पर छाया का प्रभाव: वोल्टेज बनाम करंट

सोलर पैनल सेल की एक श्रृंखला (Series) से बने होते हैं। जब इन पर छाया पड़ती है, तो यह न केवल उत्पादन कम करती है, बल्कि सिस्टम के घटकों पर दबाव भी डालती है। आइए समझते हैं कि छाया वोल्टेज और करंट को अलग-अलग कैसे प्रभावित करती है।


​1. करंट (Current - I) पर प्रभाव

​छाया का सबसे बड़ा और सीधा प्रहार करंट पर होता है। सोलर सेल में करंट सीधे सूर्य की रोशनी (Irradiance) के समानुपाती होता है।

  • अवरोध (Bottleneck Effect): यदि एक स्ट्रिंग में 10 सेल सीरीज में जुड़े हैं और किसी एक सेल पर भी छाया आ जाती है, तो पूरी स्ट्रिंग का करंट उस सबसे कमजोर (छाया वाले) सेल के स्तर तक गिर जाता है।
  • उदाहरण: यदि बाकी सेल 8 एम्पीयर बना रहे हैं और छाया वाला सेल केवल 2 एम्पीयर, तो पूरी लाइन से केवल 2 एम्पीयर ही प्रवाहित होगा।

​2. वोल्टेज (Voltage - V) पर प्रभाव

​करंट की तुलना में वोल्टेज पर छाया का प्रभाव काफी कम होता है।

  • स्थिरता: जब तक सेल पर थोड़ी भी रोशनी पड़ रही है, वह अपना वोल्टेज लगभग बनाए रखता है। वोल्टेज मुख्य रूप से तापमान और सेल की बनावट पर निर्भर करता है, न कि पूरी तरह रोशनी की तीव्रता पर।
  • गिरावट: पूरी तरह से छाया होने पर ही वोल्टेज में महत्वपूर्ण गिरावट देखी जाती है। हालांकि, आधुनिक पैनलों में 'बायपास डायोड' (Bypass Diodes) के कारण वोल्टेज में कुछ चरणों में कमी आती है।

​छाया के कारण 'हॉटस्पॉट' (Hotspots) की समस्या

​जब एक सेल पर छाया होती है, तो वह बिजली बनाने के बजाय एक रेसिस्टेंस (Resistance) की तरह काम करने लगता है। बाकी सेल से आने वाला करंट इस छाया वाले सेल से जबरदस्ती गुजरने की कोशिश करता है, जिससे वह सेल अत्यधिक गर्म हो जाता है। इसे ही 'हॉटस्पॉट' कहते हैं, जो पैनल को जला भी सकता है।

​बायपास डायोड: एक समाधान

​इस समस्या से निपटने के लिए सोलर पैनल में Bypass Diodes लगाए जाते हैं।

  • काम करने का तरीका: जब किसी हिस्से पर छाया पड़ती है, तो डायोड उस प्रभावित हिस्से को सर्किट से अलग कर देता है।
  • नतीजा: इससे करंट तो बना रहता है (क्योंकि बिजली छाया वाले हिस्से को छोड़कर आगे निकल जाती है), लेकिन वोल्टेज थोड़ा कम हो जाता है क्योंकि कुछ सेल काम करना बंद कर देते हैं।

​निष्कर्ष

​सोलर सिस्टम डिजाइन करते समय छाया का प्रबंधन करना अनिवार्य है।

  1. करंट छाया के प्रति बहुत संवेदनशील है और तेजी से गिरता है।
  2. वोल्टेज तुलनात्मक रूप से स्थिर रहता है लेकिन बायपास डायोड सक्रिय होने पर कम हो जाता है।

​एक कुशल सोलर इंस्टॉलेशन वही है जहाँ पैनल को ऐसी जगह लगाया जाए जहाँ दिन के सबसे सक्रिय घंटों (सुबह 10 से शाम 4 बजे) के दौरान कोई छाया न हो।

सोलर ऊर्जा अपनाएं, भविष्य बचाएं।

Er. Krishankant(सौरदीक्षक)

Seac

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