क्या वाकई ऑन-ग्रिड इनवर्टर ग्रिड से वोल्टेज बढ़ाकर देता है? कितना सही, कितना गलत?
सौर ऊर्जा की दुनिया में यह बात एक अकाट्य सत्य की तरह दोहराई जाती है कि "ऑन-ग्रिड इनवर्टर ग्रिड के मुकाबले 2% से 5% वोल्टेज बढ़ाकर बिजली सप्लाई करता है, और इसी बढ़े हुए प्रेशर (वोल्टेज) के कारण सोलर की बिजली ग्रिड में एक्सपोर्ट हो पाती है।"
यूट्यूब वीडियो से लेकर बड़े-बड़े आर्टिकल्स तक, हर जगह यही थ्योरी पढ़ाई जाती है। .
लेकिन अगर इस थ्योरी को गहराई से परखा जाए, तो कुछ ऐसे बुनियादी तकनीकी सवाल खड़े होते हैं जो इस पूरी बात को भ्रामक और विरोधाभासी (Contradictory) साबित कर देते हैं।
आइए इन दो अनसुलझे सवालों पर नजर डालते हैं:
सवाल 1: दो अलग-अलग वोल्टेज मिलकर एक साथ लोड कैसे शेयर कर सकते हैं?
मान लेते हैं कि ग्रिड का वोल्टेज 230 V है और इनवर्टर ने नियम के मुताबिक इसे 3% बढ़ाकर 236.9V कर दिया। अब मान लीजिए कि सोलर से 5 यूनिट बिजली बन रही है और घर में 7 यूनिट का लोड चालू है। नियम यह कहता है कि ऐसे में 5 यूनिट सोलर से और बची हुई 2 यूनिट ग्रिड से मिलकर (Sharing में) लोड को चलाएंगी।
- मूल सवाल: जब दोनों सोर्स एक ही पॉइंट (LT Panel/Busbar) पर जुड़े हैं, तो 230V (ग्रिड) और 236.9V (सोलर) का यह वोल्टेज डिफरेंस आपस में टकराएगा क्यों नहीं?
- दो अलग-अलग वोल्टेज एक ही समय पर एक ही तार में मर्ज होकर किसी लोड को मिक्स शेयरिंग में कैसे चला सकते हैं? क्या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के सिद्धांतों के हिसाब से यह व्यावहारिक रूप से संभव भी है?
सवाल 2: लोड बढ़ने पर वोल्टेज फ्लक्चुएशन से इनवर्टर रीस्टार्ट क्यों नहीं होता?
हम जानते हैं कि ऑन-ग्रिड इनवर्टर पूरी तरह ग्रिड के साथ सिंक्रोनाइज (Synchronize) होकर ही आउटपुट देता है। अब मान लेते हैं कि इनवर्टर 236.9V दे रहा है और ग्रिड 230V पर है। इसी दौरान घर में कोई भारी लोड (जैसे एसी या मोटर) ऑन होता है। हम सब जानते हैं कि हैवी लोड शुरू होते ही सिस्टम में वोल्टेज ड्रॉप या फ्लक्चुएशन होता है।
- मूल सवाल: अगर लोड बदलने से या ग्रिड की तरफ से वोल्टेज में जरा सा भी बदलाव आता है, तो इनवर्टर का सिंक्रोनाइजेशन तो तुरंत टूटना चाहिए। तकनीक के नियम से तो वोल्टेज बदलते ही इनवर्टर को ट्रिप या रीस्टार्ट हो जाना चाहिए।
- लेकिन असलियत में ऐसा नहीं होता; इनवर्टर बिना रीस्टार्ट हुए लगातार चलता रहता है। तो फिर यह कैसे मान लिया जाए कि इनवर्टर लगातार ग्रिड से 2-3% वोल्टेज बढ़ाकर ही आउटपुट दे रहा है?
ये दोनों सवाल साफ इशारा करते हैं कि ऑन-ग्रिड इनवर्टर के वोल्टेज बढ़ाने की यह थ्योरी जितनी आसान दिखती है, उतनी है नहीं। इसके पीछे की असली कहानी या तो कुछ और है, या फिर हमें जो समझाया जाता है उसमें एक बड़ा तकनीकी झोल है!
कमेंट में बताइए अपनी राय! क्या वाकई ऑन-ग्रिड इनवर्टर वोल्टेज बढ़ाकर ग्रिड को दबाता है, या फिर इसके पीछे कोई और ही गहरा राज़ छुपा है? आपको क्या लगता है, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का कौन सा नियम यहाँ काम कर रहा है? अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें!
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Er. Krishankant
NCVT & NSDC Certified
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