पाहुनो के मारे सांप नहीं मरै” — सोलर मार्केट की एक सच्ची कहानी
नमस्ते दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर!
आज आपके साथ एक ऐसा अनुभव शेयर करने जा रहा हूँ, जिसे पढ़कर आप चौंक भी जाएँगे और सोलर लगवाने से पहले दस बार सोचने पर मजबूर भी हो जाएँगे। जागरूकता ही समझदारी है, और आज का वाकया इसी पर आधारित है।
दावा 5000 का, हकीकत 10 की!
आज बाज़ार में घूमते-घूमते एक सोलर वाले भाईसाहब मिल गए। बातों-बातों में अपनी कंपनी की ब्रांडिंग करते हुए बड़े गर्व से बोले, "सर, हमारी कंपनी के 5000 से ज्यादा सोलर प्रोजेक्ट्स कम्प्लीट हो चुके हैं!"
मैंने कहा, "वाह! ये तो बहुत ही बढ़िया बात है।" फिर मैंने उत्सुकता से पूछा, "वैसे भाईसाहब, अपने भोपाल में कहां-कहां लगे हैं आपके प्रोजेक्ट?"
अब यहाँ से कहानी में ट्विस्ट आता है। वो थोड़ा झिझके और बोले, "अरे सर, यहाँ भोपाल में तो अभी 1 या 2 ही लगे हैं।"
मैंने सोचा चलो कोई बात नहीं, पूरी स्टेट में फैले होंगे। मैंने कहा, "अच्छा, यानी पूरे मध्यप्रदेश में काफी प्रोजेक्ट्स होंगे आपके?"
वो बोले, "हां, मध्यप्रदेश में 8-10 तो लग ही गए हैं।"
अब मेरा सिर चकराया! कहाँ शुरुआत 5000 प्रोजेक्ट्स से हुई थी, और सुई आकर टिक गई सीधे 8-10 पर! मैंने सीधे पूछ ही लिया, "भाई, जब एमपी में सिर्फ 8-10 ही हैं, तो बाकी के 4990 प्रोजेक्ट्स कहाँ आसमान में लगे हैं?"
तब जाकर उन्होंने असली सच उगला। बोले, "दरअसल हमारी मेन कंपनी गुजरात की है, जिसके 5000 प्रोजेक्ट्स हैं। हमने तो बस यहाँ उसकी फ्रैंचाइज़ी (Franchise) ली है।"
फ्रैंचाइज़ी का खेल और ग्राहकों का भरोसा
सच बताऊं दोस्तों, मुझे उनकी बात सुनकर आश्चर्य भी हुआ और थोड़ा अजीब भी लगा। सोचिए, जो इंसान मुझसे ये बात कह रहा था, वो आम ग्राहकों को भी इसी तरह 5000 का आंकड़ा दिखाकर इम्प्रेस करता होगा। आम ग्राहक तो बड़ी-बड़ी बातें और नंबर सुनकर झांसे में आ जाता है और बिना सोचे-समझे लाखों का इन्वेस्टमेंट कर बैठता है।
लेकिन क्या बड़ी कंपनी का नाम होने से आपको लोकल स्तर पर अच्छी सर्विस की गारंटी मिल जाती है? बिल्कुल नहीं!
हमारे गाँव की वो कहावत: "पाहुनो के मारे सांप नहीं मरै"
ये बाहरी कंपनियां या सिर्फ कागज़ पर फ्रैंचाइज़ी लेकर बैठे लोग आपके ज़िले या राज्य के लिए सिर्फ 'मेहमान' (पाहुन) की तरह हैं। हमारे गाँव में एक बहुत पुरानी और सटीक कहावत है— "पाहुनो के मारे सांप नही मरै।"
इसका सीधा सा मतलब है कि मेहमानों से कभी किसी बड़े या ज़िम्मेदारी वाले काम की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। आज वो यहाँ हैं, कल अगर फ्रैंचाइज़ी बंद करके चले गए, तो आपके सोलर सिस्टम की सर्विसिंग कौन करेगा? 25 साल तक चलने वाले सोलर पैनल के लिए क्या आप किसी ऐसे वेंडर पर भरोसा करेंगे जिसका अपना कोई मजबूत लोकल बेस ही न हो?
'सोलार चर्चा' की सलाह: जागरूक बनें, लोकल चुनें!
सोलर लगवाना एक वन-टाइम इन्वेस्टमेंट है जो सालों-साल चलता है। इसलिए किसी भी वेंडर की बातों में आने से पहले ये बातें ज़रूर गांठ बांध लें:
- दावों की जांच करें: अगर कोई वेंडर 5000 प्रोजेक्ट्स बताता है, तो उससे सीधे पूछिए कि आपके अपने शहर या ज़िले में कितने चालू प्रोजेक्ट्स हैं और उनका फीडबैक क्या है।
- बातों से ज़्यादा फेस वैल्यू देखें: वेंडर की मार्केटिंग की चिकनी-चुपड़ी बातों से ज़्यादा उसकी मार्केट वैल्यू, उसकी साख और उसकी लोकल उपस्थिति (Local Presence) को देखें।
- लोकल वेंडर पर भरोसा करें: लोकल वेंडर हमेशा आपके आस-पास रहेगा। कोई भी तकनीकी दिक़्क़त आने पर आप सीधे उसके ऑफिस जा सकते हैं या उसे बुला सकते हैं। लोकल वेंडर के लिए उसकी 'फेस वैल्यू' ही सब कुछ होती है, इसलिए वो सर्विस देने में आनाकानी नहीं करेगा।
चलते-चलते बस इतना ही कहूँगा: जागरूक बनिए, समझदार बनिए। सोलर लगवाने से पहले वेंडर के दावों का 'शॉर्ट सर्किट' करना बेहद ज़रूरी है!
आपको क्या लगता है, क्या बड़ी कंपनियों के नाम पर फ्रैंचाइज़ी बेचने वाले वेंडर्स पर भरोसा करना ठीक है? अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर शेयर करें!
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