लाइट जाने पर क्यों बंद हो जाता है ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम? जानिए 'एंटी-आइलैंडिंग' का यह बड़ा कारण!
सोचिए, आपने लाखों रुपये खर्च करके अपने घर की छत पर एक शानदार ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम (On-Grid Solar System) लगवाया। दोपहर का समय है, सूरज पूरी तरह चमक रहा है, लेकिन अचानक आपके इलाके की बिजली (Grid Power) चली जाती है। आप सोचते हैं कि सोलर तो बिजली बना ही रहा है, तो घर की लाइट चालू रहनी चाहिए। लेकिन, अचानक आपका सोलर सिस्टम भी बंद हो जाता है!
ऐसा क्यों होता है? क्या आपका सिस्टम खराब है?
जी नहीं! आपका सिस्टम बिल्कुल ठीक काम कर रहा है। दरअसल, इसके पीछे एक बहुत ही महत्वपूर्ण सुरक्षा तकनीक काम करती है, जिसे सोलर की भाषा में 'एंटी-आइलैंडिंग प्रोटेक्शन' (Anti-Islanding Protection) कहा जाता है। आइए आज की 'सोलर चर्चा' में इसे बिल्कुल आसान शब्दों में समझते हैं।
ऑन-ग्रिड सोलर काम कैसे करता है?
यह जानने से पहले कि सिस्टम बंद क्यों होता है, हमें यह समझना होगा कि ऑन-ग्रिड सिस्टम काम कैसे करता है।
ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम सीधे आपके सरकारी ग्रिड (बिजली सप्लाई) से जुड़ा होता है। इसका इनवर्टर (Grid-Tied Inverter) ग्रिड की फ्रीक्वेंसी (Frequency) और वोल्टेज (Voltage) के साथ तालमेल (Synchronize) मिलाकर ही बिजली को आपके घर और ग्रिड में भेजता है। यानी, बिना सरकारी बिजली की मौजूदगी के, ऑन-ग्रिड इनवर्टर काम नहीं कर सकता।
क्या है यह 'आइलैंडिंग' (Islanding) और 'एंटी-आइलैंडिंग'?
मान लीजिए, आपके इलाके के ट्रांसफार्मर में कोई खराबी आ गई या बिजली विभाग को ग्रिड की मरम्मत (Maintenance) करनी है। ऐसे में वे पीछे से पावर सप्लाई (Grid Power) को बंद कर देते हैं।
अगर बिजली कटने के बाद भी आपके घर का ऑन-ग्रिड सोलर चालू रहता है, तो वह बिजली बनाकर वापस सरकारी तारों (Grid Lines) में भेजने लगेगा। तकनीकी भाषा में, मुख्य ग्रिड बंद होने के बावजूद आपके सोलर सिस्टम द्वारा बनाए गए इस छोटे से बिजली के द्वीप को 'आइलैंड' (Island) कहा जाता है।
और इस स्थिति को रोकने की प्रक्रिया को एंटी-आइलैंडिंग (Anti-Islanding) कहते हैं।
सोलर का बंद होना क्यों ज़रूरी है? (The Safety Factor)
अब सवाल आता है कि अगर बिजली ग्रिड में जा भी रही है, तो दिक्कत क्या है? इसके दो सबसे बड़े कारण हैं:
1. लाइनमैन की सुरक्षा (Human Safety)
जब ग्रिड में खराबी आती है, तो बिजली विभाग के लाइनमैन तारों को ठीक करने के लिए खंभे पर चढ़ते हैं। उन्हें पता होता है कि पीछे से पावर बंद है। लेकिन अगर आपके सोलर सिस्टम ने ग्रिड में बिजली भेजना जारी रखा, तो उन तारों में करंट दौड़ता रहेगा। ऐसे में मरम्मत कर रहे लाइनमैन को जानलेवा बिजली का झटका (Electric Shock) लग सकता है। यह उनकी सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है।
2. उपकरणों और ग्रिड की सुरक्षा
जब ग्रिड फेल होता है, तो वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी पूरी तरह अस्थिर हो जाती है। अगर इनवर्टर बंद नहीं हुआ, तो यह वोल्टेज का उतार-चढ़ाव आपके घर के कीमती उपकरणों और खुद सोलर इनवर्टर को भी फूंक सकता है।
इनवर्टर कैसे करता है यह काम?
आजकल के जितने भी आधुनिक ऑन-ग्रिड इनवर्टर आते हैं, वे बेहद स्मार्ट होते हैं। उनके अंदर इन-बिल्ट एंटी-आइलैंडिंग रिले (Relay) और सेंसर्स होते हैं।
जैसे ही ग्रिड की बिजली जाती है, इनवर्टर को ग्रिड का सिग्नल मिलना बंद हो जाता है। मात्र मिल्कीसेकंड्स (Milliseconds) के भीतर, इनवर्टर ग्रिड से अपना संपर्क काट लेता है और बिजली बनाना पूरी तरह बंद कर देता है। जैसे ही सरकारी बिजली वापस आती है, इनवर्टर कुछ देर (आमतौर पर 3 से 5 मिनट) ग्रिड को ऑब्जर्व करता है और सब कुछ स्थिर होने पर खुद-ब-खुद ऑन हो जाता है।
निष्कर्ष: सुरक्षा ही सर्वोपरि है!
तो अगली बार जब लाइट जाने पर आपका ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम बंद हो जाए, तो परेशान न हों। यह इस बात का सबूत है कि आपका इनवर्टर पूरी तरह सुरक्षित है और किसी लाइनमैन की जान बचा रहा है।
कृष्णा की टिप: अगर आप चाहते हैं कि लाइट जाने पर भी आपका सोलर काम करे, तो आपको ऑफ-ग्रिड (Off-Grid) या हाइब्रिड सोलर सिस्टम (Hybrid Solar System) की तरफ जाना चाहिए, जिसमें बैटरी बैकअप होता है।
आपको यह जानकारी कैसी लगी? नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं और इस ब्लॉग को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जिन्होंने घर में ऑन-ग्रिड सोलर लगवाया है!
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Er. Krishankant
आपका सौरदीक्षक
www.seac.in
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