सोलर पैनल स्ट्रक्चर लगाते समय ये गलतियां पड़ेंगी भारी: 'शॉर्टकट' कहीं प्लांट को उड़ा न ले जाए!

आज के समय में बिजली का बिल बचाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए लोग तेजी से सोलर पैनल लगवा रहे हैं। यह एक बेहतरीन इन्वेस्टमेंट है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक छोटी सी लापरवाही या पैसों की बचत आपके लाखों के सोलर प्लांट को पल भर में तबाह कर सकती है?


​सोलर सिस्टम में जितना महत्व पैनल और इन्वर्टर का है, उतना ही—बल्कि उससे भी ज्यादा—महत्व सोलर स्ट्रक्चर (Solar Structure) और सिविल वर्क (Civil Work) का है। आज हम बात करेंगे उन दो बड़ी गलतियों की, जो आजकल लोग (या कुछ अनुभवहीन वेंडर्स) धड़ल्ले से कर रहे हैं, और जानेंगे कि स्ट्रक्चर लगाते समय किन सावधानियों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

​1. ज्यादा पैनल लगाने का लालच: बाउंड्री वॉल से बाहर पैनल झुलाना (Overhanging)

​आजकल छतों पर जगह कम होने के कारण ज्यादा किलोवाट का सिस्टम लगाने के चक्कर में लोग एक खतरनाक शॉर्टकट अपना रहे हैं। वे स्ट्रक्चर को बाउंड्री वॉल से बाहर निकाल देते हैं, जिससे आधा पैनल हवा में झूलता रहता है।

  • खतरा क्यों है? जब तेज आंधी या तूफान आता है, तो हवा नीचे से ऊपर की तरफ बहुत तेजी से दबाव बनाती है (इसे Uplift Pressure कहते हैं)। अगर पैनल बाउंड्री से बाहर हवा में झूल रहा है, तो हवा उसे नीचे से आसानी से पकड़ लेती है और एक 'पैराशूट' की तरह ऊपर की तरफ खींचती है।
  • नुकसान: ऐसा होने पर पूरा स्ट्रक्चर उखड़ सकता है, जिससे न सिर्फ आपका लाखों का नुकसान होगा, बल्कि वह पैनल किसी के घर या राहगीर पर गिर सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

​2. कॉस्ट कटिंग का खतरनाक खेल: फास्टनर्स (Fasteners) की चोरी

​यह एक ऐसा 'अदृश्य धोखा' है जो आसानी से पकड़ में नहीं आता। सोलर स्ट्रक्चर के लेग्स (पैर) को छत के कंक्रीट से मजबूती से जोड़ने के लिए एंकर फास्टनर्स (Anchor Fasteners) का इस्तेमाल किया जाता है। नियम के मुताबिक, हर एक लेग (प्लेट) में कम से कम 4 फास्टनर्स लगने चाहिए।

​लेकिन कुछ लोग या वेंडर्स पैसे बचाने के चक्कर में 4 की जगह सिर्फ 1 या 2 फास्टनर्स ही लगाते हैं।

  • सिविल वर्क का पर्दा: इस चालाकी को छिपाने के लिए वे ऊपर से सीमेंट का कंक्रीट ब्लॉक (राफ्ट/फाउंडेशन) बना देते हैं। ऊपर से देखने वाले को लगता है कि काम बहुत मजबूत हुआ है, क्योंकि फास्टनर्स तो सीमेंट के नीचे छुप जाते हैं।
  • अंजाम: यह मजबूती सिर्फ दिखावा होती है। अंदर से बेस कमजोर होने के कारण, जैसे ही भारी तूफान आता है, स्ट्रक्चर कंक्रीट ब्लॉक समेत छत से उखड़ जाता है। लोगों को लगता है कि सीमेंट का ब्लॉक टूट गया, लेकिन असलियत यह होती है कि नीचे फास्टनर्स की पकड़ ही नहीं थी।

​3. ब्रेसिंग (Bracing) और सपोर्ट को नजरअंदाज करना: हिलता हुआ ढांचा

​अक्सर लोग सोचते हैं कि सिर्फ सीधे खंभे (Legs) खड़े कर दिए और उन पर पैनल कस दिए तो काम हो गया। लेकिन वे ब्रेसिंग (Cross Bracing) और एडिशनल सपोर्ट लगाना भूल जाते हैं या पैसे बचाने के लिए इसे टाल देते हैं। ब्रेसिंग का मतलब होता है दो खंभों के बीच में तिरछी (X या V शेप में) लगाई जाने वाली लोहे की पट्टियां या एंगल्स।

  • खतरा क्यों है? जब तेज आंधी चलती है, तो हवा सिर्फ ऊपर या नीचे से ही नहीं, बल्कि दाईं और बाईं तरफ से भी (Cross Winds) टकराती है। अगर स्ट्रक्चर में ब्रेसिंग नहीं है, तो हवा के दबाव से पूरा ढांचा आगे-पीछे या दाएं-बाएं डोलने लगता है (जिसे Swaying कहते हैं)।
  • अंजाम: लगातार हिलने के कारण नट-बोल्ट ढीले हो जाते हैं, पैनलों में माइक्रो-क्रैक्स (बारीक दरारें) आ सकते हैं और अंततः पूरा स्ट्रक्चर ताश के पत्तों की तरह एक तरफ ढह जाता है।

​सोलर स्ट्रक्चर लगाते समय बरतें ये जरूरी सावधानियां:

​अगर आप अपने सोलर प्लांट को 25 साल तक सुरक्षित देखना चाहते हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • बाउंड्री के अंदर रहें: पैनल का कोई भी हिस्सा आपकी छत या बाउंड्री वॉल से बाहर हवा में नहीं लटकना चाहिए। भले ही आधा किलोवाट सिस्टम कम लगे, लेकिन सुरक्षा से समझौता न करें।
  • फास्टनर्स की गिनती खुद चेक करें: सिविल वर्क (सीमेंट-कंक्रीट डालने) से पहले खुद जाकर देखें कि हर लेग में पूरे 4 फास्टनर्स अच्छी क्वालिटी के लगे हैं या नहीं।
  • ​हॉट डिप जीआई (GI) स्ट्रक्चर का ही उपयोग करें: हमेशा हॉट-डिप गैल्वनाइज्ड (Hot-Dip Galvanized) आयरन स्ट्रक्चर का इस्तेमाल करें, जिसमें जंग न लगे। जंग लगने से भी स्ट्रक्चर कमजोर होकर टूट जाते हैं।
  • विंड स्पीड (Wind Speed) का ध्यान रखें: आपका स्ट्रक्चर ऐसा होना चाहिए जो आपके इलाके की अधिकतम हवा की रफ्तार (आमतौर पर 150 km/h तक) को झेल सके। इसके लिए सही थिकनेस (मोटाई) के चैनल का उपयोग करें।
  • क्रॉस ब्रेसिंग (Cross Bracing) जरूर लगवाएं: जहां भी स्ट्रक्चर की ऊंचाई ज्यादा हो (जैसे हाई-राइज या एलिवेटेड स्ट्रक्चर), वहां खंभों को आपस में जोड़ने के लिए X या V पैटर्न में ब्रेसिंग जरूर लगवाएं। यह स्ट्रक्चर को चारों तरफ से जकड़ कर रखता है और उसे हिलने नहीं देता।
  • लंबी बीम के नीचे एडिशनल सपोर्ट: अगर दो लेग्स के बीच की दूरी ज्यादा है या पैनल की रो (Row) लंबी है, तो बीच-बीच में एडिशनल वर्टिकल सपोर्ट (लेग्स) जरूर दें ताकि भारी बारिश या हवा के दबाव में स्ट्रक्चर बीच से झुके नहीं।

​निष्कर्ष (Conclusion)

​सोलर प्लांट बार-बार नहीं लगाया जाता, यह 25 साल का इन्वेस्टमेंट है। स्ट्रक्चर और सिविल वर्क में की गई चंद रुपयों की 'कॉस्ट कटिंग' या ज्यादा बिजली बनाने का 'लालच' आपके पूरे सिस्टम को हवा में उड़ा सकता है।

याद रखें: दुर्घटना होने के बाद पछताने से बेहतर है कि शुरुआत में ही सही तकनीक और ईमानदारी से काम करवाया जाए। हमेशा किसी सर्टिफाइड और अनुभवी सोलर कंसलटेंट या वेंडर से ही काम कराएं।

​सुरक्षित रहें, सही चुनें!

आपको यह जानकारी कैसी लगी? अगर आप भी अपने घर पर सोलर लगाने की सोच रहे हैं, तो कमेंट में अपने सवाल जरूर पूछें!

Er. Krishankant

सौरदीक्षक

www.seac.in

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