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Magnelis vs ZAM Steel: जानिए दोनों का सच और मुख्य अंतर | Complete Guide

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सोलर इंडस्ट्री में अक्सर नए-नए शब्द और तकनीकों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। सोलर चर्चा विद कृष्णा पर हमारा हमेशा से यही प्रयास रहता है कि सोलर फील्ड से जुड़ी हर छोटी-बड़ी तकनीकी बात को आपके सामने एकदम सरल और सटीक भाषा में रखा जाए। ​आजकल सोलर मार्केट में एक नई बहस देखने को मिल रही है— Magnelis (मैग्नेलिस) बनाम ZAM (जैम) । कई सप्लायर्स और वेंडर्स इन दोनों को इस तरह पेश कर रहे हैं जैसे ये दो बिल्कुल अलग-अलग और नई धातुएं हों। अगर आप भी अपने सोलर प्रोजेक्ट या स्ट्रक्चर के लिए सही मटेरियल चुनने में असमंजस में हैं, तो सोलर चर्चा विद कृष्णा का यह ब्लॉग आपके सारे डाउट क्लियर कर देगा। ​क्या Magnelis और ZAM वास्तव में अलग हैं? ​ संक्षिप्त उत्तर है: नहीं, दोनों एक ही तकनीक का हिस्सा हैं। ​तकनीकी भाषा में समझें तो Magnelis और ZAM दोनों ही Zinc-Aluminum-Magnesium (Zn-Al-Mg) अलॉय कोटिंग फैमिली से आते हैं। ​ सोलर चर्चा विद कृष्णा का आसान उदाहरण: जैसे पानी को फिल्टर करने के लिए RO टेक्नोलॉजी एक ही होती है, लेकिन अलग-अलग कंपनियां उसे अपने ब्रांड नाम से बेचती हैं; ठीक वैसे ही...

समाज ही समाज को नुकसान पहुंचाता है: सोलर इंडस्ट्री का कड़वा सच

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आपने अक्सर ध्यान दिया होगा कि आज के दौर में सड़क पर चलते किसी जरूरतमंद मुसाफिर को लिफ्ट देने से पहले भी इंसान दस बार सोचता है। मन में पहला ख्याल सुरक्षा का आता है। ठीक यही स्थिति साधु-संतों, फकीरों या संन्यासियों को देखकर भी बनती है। कुछ ढोंगी और पाखंडी लोगों की करतूतों का नतीजा यह हुआ कि समाज का भरोसा सच्चे, ज्ञानी और निस्वार्थ संन्यासियों पर से भी उठने लगा है। धोखेबाज इंसानों की वजह से इंसानियत और अच्छाई पर से लोगों का यकीन कम होता जा रहा है। ​ठीक यही कड़वी सच्चाई आज हमारी सोलर इंडस्ट्री पर भी लागू होती है। सुनने में शायद थोड़ा अजीब लगे, लेकिन अगर आप गहराई से सोचेंगे, तो पाएंगे कि कुछ फर्जी और गैर-जिम्मेदार वेंडर्स की गलतियों की सजा आज पूरा सोलर समाज भुगत रहा है। ​ गलत इंस्टॉलेशन और बिगड़ती छवि ​जब कोई अकुशल या फर्जी वेंडर बिना सही शैडो एनालिसिस (Shadow Analysis) और बिना तकनीकी जानकारी के किसी ग्राहक के घर सोलर पैनल छायादार जगह पर लगा देता है, या घटिया क्वालिटी का सामान इस्तेमाल कर गलत वायरिंग कर देता है, तो नुकसान सिर्फ उस एक ग्राहक का नहीं होता। ​जब वह सिस्टम सही जनरेशन नहीं दे...

पीएम सूर्य घर योजना: सोलर वेंडर ने किया खराब काम या फ्रॉड? जानें कहाँ और कैसे करें ऑफिशियल शिकायत

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सोलर पैनल लगवाना एक बड़ा इन्वेस्टमेंट है और जब बात सब्सिडी वाले प्लांट की हो, तो कस्टमर को सही क्वालिटी और सर्विस मिलने का पूरा हक है। लेकिन क्या हो अगर नेशनल पोर्टल पर रजिस्टर्ड वेंडर घटिया सामान लगा दे, नेट-मीटरिंग में देरी करे, या इंस्टॉल करने के बाद आपकी कॉल उठाना बंद कर दे? ​अगर आप या आपका कोई कस्टमर ऐसी समस्या से जूझ रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) और नेशनल पोर्टल के सख्त नियम हैं, जिनके तहत आप दोषी वेंडर की शिकायत करके उस पर कार्रवाई करवा सकते हैं। ​आइए जानते हैं शिकायत दर्ज कराने के ऑफिशियल तरीके: ​ 1. पीएम सूर्य घर पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें अगर आपने नेशनल पोर्टल के जरिए अप्लाई किया है, तो आपकी सबसे पहली और सीधी शिकायत पोर्टल पर ही दर्ज होगी: ​सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट pmsuryaghar.gov.in पर जाएं। ​अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से Consumer Login करें। ​डैशबोर्ड पर "Grievance / Helpdesk" या "Raise a Query" सेक्शन पर क्लिक करें। ​अपनी एप्लीकेशन आईडी चुनें और वेंडर के खिलाफ पूरी समस्य...

ZAM स्ट्रक्चर बनाम Hot Dip GI (HDGI) स्ट्रक्चर: सोलर प्रोजेक्ट के लिए कौन सा चुनें?

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सोलर पैनल का लाइफस्पैन 25 से 30 साल का होता है। लेकिन अगर सोलर प्लेट्स को थामने वाला माउंटिंग स्ट्रक्चर मजबूत और जंग-रोधी न हो, तो पूरा सिस्टम समय से पहले कमजोर हो सकता है। ​आज के समय में सोलर इंडस्ट्री में दो तरह के स्ट्रक्चर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं— ZAM (Zinc-Aluminum-Magnesium) और Hot Dip Galvanized Iron (HDGI) । आइए समझते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है, कौन सा बेहतर है और आपको अपने प्रोजेक्ट के लिए कौन सा चुनना चाहिए। ​ ZAM और Hot Dip GI का मुख्य अंतर ​ कोटिंग और कंपोजिशन: HDGI में स्ट्रक्चर के ऊपर शुद्ध जिंक (Zinc) की परत चढ़ाई जाती है। वहीं ZAM स्ट्रक्चर में जिंक के साथ एल्युमिनियम और मैग्नीशियम का एडवांस एलॉय कोटिंग होता है। ​ Self-Healing क्षमता (सबसे बड़ा फायदा): HDGI स्ट्रक्चर को साइट पर काटते या ड्रिल (छेद) करते समय जिंक की कोटिंग हट जाती है, जिससे उस जगह पर जंग (Rust) लगने का खतरा बढ़ जाता है। ZAM स्ट्रक्चर में Self-Healing प्रॉपर्टी होती है; यानी कटने या ड्रिल होने पर एल्युमिनियम और मैग्नीशियम की केमिकल लेयर खुद-ब-खुद उस हिस्से को कवर कर लेती है...

सोलर कुकिंग क्रांति: PV vs CSP तकनीक, फायदे और बिजनेस अपॉर्चुनिटी

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  हेलो दोस्तों! सोलर चर्चा विथ कृष्णा (Solar Charcha with Krishna) में आपका स्वागत है । मैं कृष्णा (सोलर एक्सपर्ट) —आज हम बात करेंगे एक ऐसे विषय पर जो न सिर्फ हमारे रसोई के बजट को सुधार सकता है, बल्कि सोलर इंडस्ट्री में नए स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए बिजनेस के नए दरवाजे भी खोल रहा है: सोलर कुकिंग सिस्टम (Solar Cooking System) । आज सोलर कुकिंग केवल साधारण बॉक्स टाइप सोलर कुकर तक सीमित नहीं है। तकनीकी प्रगति के कारण आज हमारे पास दो मुख्य तकनीकें मौजूद हैं: PV (फोटोवोल्टिक) आधारित कुकिंग और CSP (कंसंट्रेटेड सोलर पावर) आधारित कुकिंग । आइए इन दोनों तकनीकों को गहराई से समझें और जानें कि इसमें बिजनेस के क्या अवसर हैं। 1. PV आधारित सोलर कुकिंग सिस्टम (Solar PV Cooking System) सोलर फोटोवोल्टिक (PV) कुकिंग में सोलर पैनल सूर्य के प्रकाश को सीधे DC बिजली में बदलते हैं । इस बिजली का उपयोग इंडक्शन कुकटॉप, इंफ्रारेड हीटर या ओवन चलाने के लिए किया जाता है। मुख्य घटक: सोलर PV पैनल: धूप से बिजली जनरेट करने के लिए (Mono PERC / TOPCon पैनल बेहतरीन प्रदर्शन देते हैं)। इन्वर्टर / कंट्रोलर: पावर...

सोलर झटका मशीन क्या है? जानें उपयोग, फायदे, खर्च और बिजनेस के मौके

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खेती में फसल उगाना जितना कठिन है, उसकी सुरक्षा करना उससे भी बड़ा चुनौतीपूर्ण काम है। रात-दिन की मेहनत से उगाई गई फसल को नीलगाय, जंगली सूअर और आवारा पशु मिनटों में बर्बाद कर देते हैं। इस समस्या का सबसे सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक समाधान है— सोलर झटका मशीन (Solar Fencing System) । ​ सोलर झटका मशीन क्या है? सोलर झटका मशीन एक सौर ऊर्जा से चलने वाला सुरक्षा उपकरण है। यह सोलर पैनल और बैटरी की मदद से खेत के चारों ओर लगे तारों में हाई-वोल्टेज DC पल्स (करंट के छोटे झटके) भेजता है। ​जब भी कोई जानवर बाड़ के तार को छूता है, तो उसे एक जोरदार झटका लगता है और वह डरकर भाग जाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह झटका पूरी तरह से सुरक्षित और अहिंसक होता है—इससे किसी जानवर या इंसान की जान को कोई नुकसान नहीं पहुँचता। ​ सोलर झटका मशीन का उपयोग कहाँ होता है? ​ कृषि क्षेत्र: खेतों को आवारा और जंगली जानवरों से बचाने के लिए। ​ बागवानी: फल, सब्जी और नर्सरी की घेराबंदी में। ​ डेयरी व पॉल्ट्री फार्म: मवेशियों को बाहरी हिंसक जानवरों से सुरक्षित रखने के लिए। ​ व्यावसायिक संपत्ति: गोद...

सोलर वाटर हीटर जो नेट मीटरिंग की चकाचौंध में कहीं खो गया!

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आज जब भी सौर ऊर्जा (Solar Energy) की बात होती है, तो हर तरफ सिर्फ सोलर रूफटॉप पैनल, ऑन-ग्रिड सिस्टम और 'नेट मीटरिंग' का ही शोर सुनाई देता है। बिजली का बिल ज़ीरो करने की इस होड़ में हम उस सबसे सरल, टिकाऊ और सीधी बचत देने वाली तकनीक को भूलते जा रहे हैं, जो सालों से हमारे छतों पर चुपचाप काम कर रही है— सोलर वाटर हीटर (Solar Water Heater) । ​जब मुख्य उद्देश्य सिर्फ पानी गर्म करना हो, तो सूरज की रोशनी से पहले बिजली बनाना (Solar PV) और फिर उस बिजली से इलेक्ट्रिक गीजर चलाकर पानी गर्म करना एक लंबा, खर्चीला और कम कुशल रास्ता है। इसकी जगह सोलर वाटर हीटर सीधे सूरज की उष्मा (Thermal Energy) का उपयोग करके पानी गर्म करता है। ​सोलर वाटर हीटर क्या होता है? ​सोलर वाटर हीटर एक ऐसा थर्मल सिस्टम है जो सूर्य की किरणों में मौजूद गर्मी (Heat) को सोखकर सीधे पानी को गर्म करता है। इसमें किसी भी प्रकार की ग्रिड बिजली या इनवर्टर की आवश्यकता नहीं होती। ​यह दिनभर धूप से पानी गर्म करता है और इसके साथ लगे विशेष इंसुलेटेड (उष्मारोधक) स्टोरेज टैंक में पानी पूरे 24 घंटे तक गर्म रहता है, जिससे आपको रात में या ...

सोलर स्ट्रीट लाइट का बदलता सफर: कन्वेंशनल बनाम सेमी-इंटीग्रेटेड या ऑल इन वन , मेंटेनेंस का सच और बिजनेस के अवसर

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आज के समय में सोलर स्ट्रीट लाइट केवल रोशनी का जरिया नहीं, बल्कि ऊर्जा बचत का सबसे बेहतरीन माध्यम बन चुकी है। बाजार में समय-समय पर नई-नई तकनीकें आईं—पहले कन्वेंशनल, फिर ऑल-इन-वन और अब सेमी-इंटीग्रेटेड। ​लेकिन क्या हर नई तकनीक व्यावहारिक रूप से भी सही होती है? आइए, सोलर स्ट्रीट लाइट के इस पूरे विकास क्रम, मेंटेनेंस की सच्चाई और इसमें छिपे कमाई के अवसरों को विस्तार से समझते हैं। ​1. सोलर स्ट्रीट लाइट का विकास क्रम और उनकी समस्याएं ​क) कन्वेंशनल सोलर स्ट्रीट लाइट (Conventional System) ​यह सबसे पहला और पारंपरिक मॉडल है। इसमें सोलर पैनल, LED फिक्स्चर, बैटरी और चार्ज कंट्रोलर—सब अलग-अलग हिस्सों में आते हैं। पोल पर एक लोहे का बॉक्स बनाकर बैटरी और कंट्रोलर रखा जाता है। ​ख) ऑल-इन-वन सोलर स्ट्रीट लाइट (All-In-One System) ​जब लिथियम बैटरी आई, तो कंपनियों ने सब कुछ—पैनल, बैटरी, LED लाइट और कंट्रोलर—एक ही बॉडी में पैक कर दिया। इसे ऑल-इन-वन कहा गया। ​ ऑल-इन-वन की सबसे बड़ी नाकामी (Orientation Problem): सोलर पैनल से पूरी चार्जिंग पाने के लिए उसे हमेशा दक्षिण (South) दिशा में झुकान...

सब्सिडी और नेट मीटरिंग से आगे: सोलर बिजनेस में छुपी अन्य बड़ी संभावनाएं

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आज भारतीय सोलर मार्केट में हर तरफ ऑन-ग्रिड सिस्टम (Net Metering) और सरकारी सब्सिडी की ही चर्चा है। ग्राहक हो या नया व्यवसायी, ज्यादातर लोग केवल सब्सिडी वाले रूफटॉप ऑन-ग्रिड प्लांट के पीछे दौड़ रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि सब्सिडी ने सोलर इंडस्ट्री को एक बड़ी रफ्तार दी है, लेकिन केवल नेट मीटरिंग तक सीमित रह जाना आपके सोलर बिजनेस के दायरे को छोटा कर देता है। ​सोलर एनर्जी केवल बिजली का बिल कम करने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक विशाल और बहुआयामी मार्केट है। यदि आप सोलर सेक्टर में एक टिकाऊ और बड़ा बिजनेस बनाना चाहते हैं, तो आपको सब्सिडी और नेट मीटरिंग के अलावा अन्य सोलर प्रोडक्ट्स, कृषि उपकरण और आधुनिक सेवाओं की ओर भी ध्यान देना होगा। ​1. कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के लिए बेहतरीन सोलर प्रोडक्ट्स ​ सोलर ड्रायर (Solar Dryer): कृषि और खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) क्षेत्र में सोलर ड्रायर की भारी मांग है। मिर्च, मसाले, फल, सब्जियां और अनाज को स्वच्छ और हाइजीनिक तरीके से सुखाने के लिए किसान और व्यापारी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। ​ सोलर स्प्रेयर (Solar Agricultural Sprayers): ...

सोलर वेंडर्स (Vendors/Installers) के लिए जरूरी: साइट सर्वे करते समय कस्टमर से पूछने योग्य 10 सवाल

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​एक अच्छा सोलर वेंडर वही है जो सिर्फ अपना माल बेचने पर ध्यान न दे, बल्कि कस्टमर की वास्तविक जरूरतों और साइट की स्थिति को समझकर सही सिस्टम डिजाइन करे।  जब आप (वेंडर या इंजीनियर के रूप में) किसी कस्टमर की साइट पर सर्वे के लिए जाएं, तो कोटेशन बनाने से पहले ये 10 जरूरी सवाल कस्टमर से जरूर पूछें: ​1. आपका पिछले 1 साल का औसत बिजली बिल और मासिक यूनिट (kWh) खपत कितनी है? ​कस्टमर को अपनी जरूरत से छोटा या बड़ा सोलर प्लांट देने से बचने के लिए सबसे पहले उनकी सही खपत जानना जरूरी है। ​क्या गर्मियों और सर्दियों के बिल में बड़ा अंतर रहता है? ​क्या वे अपने बिल के स्लैब (जैसे 100 यूनिट या 400 यूनिट से ऊपर) को कम करना चाहते हैं? ​2. आपके इलाके में बिजली कटौती (Power Cut) या लो-वोल्टेज की समस्या कितनी रहती है? ​यह सवाल सिस्टम का प्रकार (On-Grid, Off-Grid या Hybrid) तय करने के लिए सबसे अहम है। ​यदि इलाके में अक्सर लंबे पावर कट रहते हैं, तो केवल ऑन-ग्रिड सिस्टम लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि बैटरी बैकअप वाला हाइब्रिड या ऑफ-ग्रिड सिस्टम सुझाना होगा। ​3. क्या आने वाले 1 से 3 सालों में घर य...

सोलर प्लांट लगवाते समय वेंडर (Vendor/Installer) से जरूर पूछें ये 10 सवाल

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जब आप अपने घर या बिजनेस के लिए सोलर सिस्टम लगवाने का फैसला कर लेते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण काम होता है एक सही और भरोसेमंद सोलर वेंडर चुनना। मार्केट में कई वेंडर्स अलग-अलग रेट्स और वादे करते हैं। ऐसे में सिर्फ कम कीमत देखकर ऑर्डर देना बाद में भारी पड़ सकता है। ​कोटेशन फाइनल करने और एडवांस पेमेंट देने से पहले अपने सोलर वेंडर से ये 10 जरूरी सवाल जरूर पूछें: ​1. मुझे कौन-कौन से कंपोनेंट्स दिए जा रहे हैं और उनकी वारंटी कितनी है? ​सोलर सिस्टम में मुख्य रूप से 5-6 जरूरी कंपोनेंट्स होते हैं। वेंडर से हर कंपोनेंट का ब्रांड और मॉडल स्पष्ट करवाएं: ​ सोलर मॉड्यूल (Solar Modules): क्या ये DCR (TopCon/Mono PERC) पैनल हैं? (परफॉर्मन्स वारंटी 25 साल और प्रोडक्ट वारंटी 10-12 साल है या नहीं?) ​ इन्वर्टर (Inverter): इन्वर्टर का ब्रांड क्या है और इसकी वारंटी कितने साल (5 साल या 10 साल) की है? ​ स्ट्रक्चर (Structure): स्ट्रक्चर का मटेरियल (HDG - Hot Dip Galvanized) और उसकी मोटाई/गेज क्या है ताकि हवा के दबाव को झेल सके? ​ केबल (DC & AC Cables): केबल कॉपर की है या एल्युमिनियम की? ...

C5, C10 और C20 रेटिंग क्या होती है? जानिए बैटरी का 'C-Rating' गणित और सही चुनाव

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सोलर और पावर बैकअप सिस्टम में सही बैटरी का चुनाव करते समय अक्सर आपके सामने C5, C10 और C20 जैसे शब्द आते हैं। साधारण भाषा में इन्हें बैटरी की C-Rating (Capacity Rating) कहा जाता है। ​सोलर चर्चा में अक्सर यह सवाल उठते हैं कि क्या केवल Ah (Ampere-Hour) देखकर बैटरी खरीदना सही है? जवाब है नहीं । C-Rating को अनदेखा करने पर बैटरी सही बैकअप नहीं दे पाती या जल्दी खराब हो जाती है। आइए सोलर चर्चा के इस ब्लॉग में आसान भाषा में समझते हैं कि C5, C10 और C20 रेटिंग क्या है, यह क्यों ज़रूरी है और इनमें क्या अंतर है। ​1. C-Rating क्या होती है और C5, C10, C20 का क्या मतलब है? ​C-Rating का मतलब होता है कि कोई बैटरी कितने घंटों में पूरी तरह से डिस्चार्ज (Discharge) होने के लिए डिज़ाइन की गई है। यहाँ 'C' का अर्थ Capacity (क्षमता) से है और उसके साथ लगा नंबर घंटों (Hours) को दर्शाता है। ​ C20 Rating: इसका मतलब है कि बैटरी को अपनी पूरी क्षमता (Ah) डिस्चार्ज करने में 20 घंटे का समय लगेगा। यह धीमी गति से डिस्चार्ज होने वाली बैटरी है। ​ C10 Rating: इसका मतलब है कि बैटरी को अपनी पूरी ...

क्या Off-Grid, Hybrid और BESS System एक ही हैं? जानें सच्चाई और इनका असली फर्क!

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नमस्ते दोस्तों! सोलर चर्चा विथ कृष्णा (Solar Charcha with Krishna) में आपका स्वागत है। ​सोलर एनर्जी की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। आजकल जब लोग अपने घर, दुकान या फैक्ट्री के लिए सोलर और बैटरी सिस्टम लगवाने की सोचते हैं, तो उनके मन में सबसे बड़ा भ्रम होता है— Off-Grid, Hybrid (Bi-directional) और BESS (Battery Energy Storage System) को लेकर! ​ज्यादातर लोगों को लगता है कि "अगर इनवर्टर के साथ बैटरी लगी है, तो सब एक ही सिस्टम है।" लेकिन एक सोलर एक्सपर्ट के तौर पर मैं आपको बता दूं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है! अगर आप बिना फर्क समझे गलत सिस्टम चुन लेते हैं, तो आपका लाखों का नुकसान हो सकता है। ​आज इस 'सोलर चर्चा' में हम आसान हिंदी भाषा में इन तीनों सिस्टम का अंतर, फायदे, नुकसान और भविष्य में इनके काम के स्कोप को बारीकी से समझेंगे। ​1. ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम (Off-Grid Solar System) ​यह सबसे पुराना और पारंपरिक बैटरी वाला सोलर सिस्टम है। इसका ग्रिड (सरकारी बिजली बोर्ड) से कोई लेना-देना नहीं होता। ​ यह कैसे काम करता है? सोलर पैनल से बनने वाली बिजली सी...

केबल ड्रेसिंग क्या है और यह क्यों जरूरी है? जानिए प्रकार, फायदे और सही तरीका

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जब भी हम किसी नए घर, ऑफिस या इंडस्ट्रियल प्लांट में इलेक्ट्रिकल या सोलर वायरिंग करवाते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान वायर की क्वालिटी और स्विच बोर्ड पर ही रहता है। लेकिन वायर डालने के बाद एक सबसे अहम कदम होता है जिसे केबल ड्रेसिंग (Cable Dressing) कहा जाता है। ​अक्सर लोग इसे सिर्फ सुंदरता के नजरिए से देखते हैं, लेकिन वास्तव में यह इलेक्ट्रिकल सेफ्टी, सिस्टम की लाइफ और मेंटेनेंस का एक बेहद जरूरी हिस्सा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि केबल ड्रेसिंग क्या होती है, यह क्यों जरूरी है और इसे करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ​केबल ड्रेसिंग क्या होती है? (What is Cable Dressing?) ​सरल शब्दों में कहें तो, इलेक्ट्रिकल वायर या केबल्स को व्यवस्थित, सुरक्षित और क्रमबद्ध तरीके से बांधकर या रूट (Route) करके बिछाने की प्रक्रिया को केबल ड्रेसिंग कहते हैं। ​जब किसी पैनल, डीबी बॉक्स (DB Box), केबल ट्रे या वायरिंग के दौरान बहुत सारे तार एक साथ आते हैं, तो उन्हें उलझने से बचाने के लिए सही तरीके से केबल टाई (Cable Ties), क्लिप्स, डक्ट और पाइप का इस्तेमाल करके एक सीध में सेट किया जाता है। ...