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Solar Marketing & Sales Training Syllabus: सोलर बिजनेस बढ़ाने की असली चाबी

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नमस्ते दोस्तों! Solar Charcha with Krishna में आपका फिर से स्वागत है। ​हमारी पिछली पोस्ट में हमने बात की थी कि सोलर पीवी रूफटॉप (Solar PV Rooftop) सेक्टर के कामों को 4 भागों में बांटा जा सकता है और हमने 'सोलर इंस्टॉलर' के ट्रेनिंग सिलेबस को समझा था। आज हम इस सीरीज़ के दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण भाग पर चर्चा करेंगे— Solar Marketing & Sales Training Syllabus । ​अक्सर लोग सोचते हैं कि जिसे सोलर की टेक्निकल जानकारी है, वो इसे बेच भी सकता है। लेकिन यह सच नहीं है। एक अच्छे इंजीनियर को भी अगर सेल्स और मार्केटिंग की सही ट्रेनिंग न मिले, तो वो क्लाइंट क्लोज नहीं कर पाता। तो आइए जानते हैं कि एक सोलर ट्रेनर को मार्केटिंग और सेल्स के सिलेबस में क्या-क्या शामिल करना चाहिए। ​1. मार्केटिंग और सेल्स में क्या फर्क है? (Marketing vs Sales) ​ट्रेनिंग की शुरुआत में ही स्टूडेंट्स को इन दोनों का अंतर समझाना बहुत जरूरी है: ​ सोलर मार्केटिंग (Marketing): यह ग्राहकों को सोलर के प्रति जागरूक (Aware) करने और लीड्स (Leads) जनरेट करने का काम है। जैसे—बैनर लगाना, सोशल मीडिया पर पोस्ट ...