समाज ही समाज को नुकसान पहुंचाता है: सोलर इंडस्ट्री का कड़वा सच
आपने अक्सर ध्यान दिया होगा कि आज के दौर में सड़क पर चलते किसी जरूरतमंद मुसाफिर को लिफ्ट देने से पहले भी इंसान दस बार सोचता है। मन में पहला ख्याल सुरक्षा का आता है। ठीक यही स्थिति साधु-संतों, फकीरों या संन्यासियों को देखकर भी बनती है। कुछ ढोंगी और पाखंडी लोगों की करतूतों का नतीजा यह हुआ कि समाज का भरोसा सच्चे, ज्ञानी और निस्वार्थ संन्यासियों पर से भी उठने लगा है। धोखेबाज इंसानों की वजह से इंसानियत और अच्छाई पर से लोगों का यकीन कम होता जा रहा है।
ठीक यही कड़वी सच्चाई आज हमारी सोलर इंडस्ट्री पर भी लागू होती है। सुनने में शायद थोड़ा अजीब लगे, लेकिन अगर आप गहराई से सोचेंगे, तो पाएंगे कि कुछ फर्जी और गैर-जिम्मेदार वेंडर्स की गलतियों की सजा आज पूरा सोलर समाज भुगत रहा है।
गलत इंस्टॉलेशन और बिगड़ती छवि
जब कोई अकुशल या फर्जी वेंडर बिना सही शैडो एनालिसिस (Shadow Analysis) और बिना तकनीकी जानकारी के किसी ग्राहक के घर सोलर पैनल छायादार जगह पर लगा देता है, या घटिया क्वालिटी का सामान इस्तेमाल कर गलत वायरिंग कर देता है, तो नुकसान सिर्फ उस एक ग्राहक का नहीं होता।
जब वह सिस्टम सही जनरेशन नहीं देता, तो वह ग्राहक निराश होकर हर किसी से यही कहता है—"सोलर तो बेकार है, काम ही नहीं करता, हम तो लगवाकर फंस गए!"
ग्राहक की इस एक बात से आसपास के दर्जनों लोग सोलर लगवाने का इरादा छोड़ देते हैं। गलती एक फर्जी वेंडर की होती है, लेकिन बदनामी पूरे सोलर तकनीक और ईमानदारी से काम करने वाले वेंडर्स की होती है।
आज सोलर इंडस्ट्री में यही समस्या फैलती जा रही है, गलत जानकारी, गलत प्रैक्टिस, गलत सलाह, मुनाफे का लालच, कमीशनखोरी और दुसरे को गिरा कर ऊपर उठने की होड़ में सोलर इंडस्ट्री का नाम खराब हो रहा है ।
क्वालिटी बनाम सस्ती कीमत की होड़
एक और बड़ा कारण है बाजार में प्राइस कटिंग और घटिया मटेरियल का खेल।
मान लीजिए, मानकों के अनुसार (Standard Components, Proper Structure & Cable) एक सही और टिकाऊ सोलर सिस्टम कम से कम 2,00,000 रुपये में तैयार होता है। अब कोई अनधिकृत या फर्जी वेंडर बिना किसी आफ्टर-सेल सर्विस की जिम्मेदारी लिए, घटिया या डुप्लीकेट सामान के साथ वही सिस्टम 1,80,000 रुपये में लगाने का वादा कर देता है।
इसके बाद मार्केट में यह चर्चा शुरू हो जाती है कि "जब 1.80 लाख में काम हो रहा है, तो 2 लाख रुपये मांगने वाले वेंडर लूट रहे हैं!"
लोग यह भूल जाते हैं कि 20,000 रुपये की यह शुरुआती बचत भविष्य में खराब जनरेशन, बार-बार फॉल्ट और बिना वारंटी के सर्विस के रूप में बहुत भारी पड़ने वाली है। सही रेट और सही क्वालिटी देने वाला वेंडर यहाँ 'चोर' मान लिया जाता है, और घटिया सामान बेचने वाला 'सस्ता और अच्छा'।
सोलर के भविष्य को बचाने के लिए चिंतन जरूरी
अगर हमने समय रहते इस विषय पर ध्यान नहीं दिया, तो सोलर एनर्जी जैसी बेहतरीन और टिकाऊ तकनीक पर से लोगों का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। समाज के ही कुछ लोग अपने छोटे से फायदे के लिए पूरे सोलर समाज और इसके भविष्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सोलर का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए ग्राहकों और सही वेंडर्स दोनों को सतर्क होना होगा:
- ग्राहकों को समझना होगा: सस्ता हमेशा अच्छा नहीं होता। सोलर 25 साल का निवेश है, सिर्फ शुरुआती कीमत न देखें बल्कि कंपोनेंट्स की क्वालिटी, वेंडर का सर्टिफिकेशन और उसकी टेक्निकल नॉलेज को जांचें।
- वेंडर्स को एकजुट होना होगा: सही जानकारी, सही गाइडेंस और क्वालिटी वर्क को ही अपनी पहचान बनाएं ताकि फर्जी वेंडर्स की गलत प्रथाओं को रोका जा सके।
यह विषय वाकई बेहद चिंता का है। अगर हम आज जागरूक नहीं हुए, तो चंद फर्जी वेंडर्स की वजह से एक पूरी हरित क्रांति (Green Energy Revolution) बदनाम हो जाएगी।
Er. Krishankant
आपका सौरदीक्षक
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