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LA (Lighting Arrester / लाइटनिंग अरेस्टर) और ESE (Early Streamer Emission / ईएसई / अर्ली स्ट्रीमर एमिशन)

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सोलर प्लांट या किसी भी इमारत को आकाशीय बिजली (Lightning) के खतरे से बचाने के लिए लाइटनिंग अरेस्टर लगाना बहुत जरूरी होता है। बाजार में मुख्य रूप से दो तरह की तकनीक उपलब्ध हैं: कन्वेंशनल एलए (Conventional Lightning Arrester) और ईएससी / ईएसई (Early Streamer Emission - ESE) । ​सही सुरक्षा उपकरण चुनने के लिए दोनों के अंतर को समझना बेहद जरूरी है। ​कन्वेंशनल एलए और ईएससी (ESE) में मुख्य अंतर ​ 1. कार्य करने का तरीका (Working Principle) ​ कन्वेंशनल एलए: यह एक साधारण पैसिव (Passive) कॉपर या जीआई रॉड होती है। जब आकाशीय बिजली सीधे इसके ऊपर गिरती है, तब यह उसे सुरक्षित रूप से जमीन (Earthing) में भेज देती है। ​ ईएससी (ESE) एलए: यह एक एडवांस एक्टिव (Active) तकनीक है। आकाशीय बिजली गिरने से पहले ही जब हवा में आयनाइजेशन (Ionization) होता है, तो यह खुद आगे बढ़कर बिजली को आकर्षित (Streamer discharge) कर लेती है और उसे सुरक्षित रूप से ग्राउंड कर देती है। ​ 2. सुरक्षा का दायरा (Protection Radius) ​ कन्वेंशनल एलए: इसका कवरेज एरिया बहुत सीमित होता है। यह केवल 45 डिग्री के कोण (Cone ...