रुक जाइए! क्या आप भी घर और इंडस्ट्री में एक ही जैसी AC केबल इस्तेमाल कर रहे हैं?

इलेक्ट्रिकल और सोलर सिस्टम के काम में अक्सर एक बड़ी चूक देखने को मिलती है—लोग कॉपर (Copper) या एल्युमीनियम (Aluminium) और 1-कोर या 2-कोर तो देख लेते हैं, लेकिन इंसुलेशन, आर्मरिंग और सेफ्टी ग्रेडिंग पर ध्यान देना भूल जाते हैं। घर की सामान्य वायरिंग और किसी हैवी इंडस्ट्री या सोलर प्लांट के AC कनेक्शन के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है। गलत केबल चुनने से न सिर्फ पावर लॉस और वोल्टेज ड्रॉप की समस्या आती है, बल्कि आग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है।


​आज के इस ब्लॉग में सोलर चर्चा विद कृष्णा पर हम समझेंगे कि AC केबल कितने अलग-अलग प्रकार की होती हैं और सही जगह सही केबल चुनना क्यों ज़रूरी है।

​1. इंसुलेशन (Insulation Type) के आधार पर केबल

​केबल के कंडक्टर पर लगा इंसुलेशन यह तय करता है कि वह कितना तापमान झेल सकती है:

  • XLPE (Cross-linked Polyethylene): आज के समय में पावर डिस्ट्रीब्यूशन और सोलर AC साइड के लिए XLPE सबसे बेहतरीन मानी जाती है। यह 90°C तक लगातार वर्किंग टेम्परेचर झेल सकती है और शॉर्ट-सर्किट की स्थिति में 250°C तक सह सकती है।
  • PVC (Polyvinyl Chloride): यह पारंपरिक इंसुलेशन है जो घरेलू और कम लोड वाली LT (Low Tension) वायरिंग में इस्तेमाल होता है। इसकी तापमान सहने की क्षमता 70°C तक ही होती है।
  • EPR (Ethylene Propylene Rubber): यह बहुत अधिक फ्लेक्सिबल होती है और ऐसी जगह इस्तेमाल होती है जहाँ वाइब्रेशन ज़्यादा हो या केबल को बार-बार मोड़ना पड़े।

​2. मेकेनिकल प्रोटेक्शन (Armouring) के आधार पर

​केबल को बाहरी चोट, कटने या जमीन के नीचे भारी दबाव से बचाने के लिए आर्मरिंग की जाती है:

  • Armoured Cable (आर्मर्ड केबल): इसमें इंसुलेशन के ऊपर मेटल की सुरक्षा परत होती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से जमीन के नीचे (Underground Cable Laying) और हैवी इंडस्ट्रीज में होता है।
    • 1-Core Cables: इसमें हमेशा Aluminium Wire Armoured (AWA) का इस्तेमाल होता है ताकि मैग्नेटिक इफ़ेक्ट से केबल गर्म न हो।
    • Multi-Core Cables (2C, 3C, 4C): इसमें Galvanized Steel Strip या Wire (GSFA/GSWA) का इस्तेमाल होता है।
  • Unarmoured Cable (अन-आर्मर्ड केबल): इसमें कोई मेटेलिक सुरक्षा परत नहीं होती। इसका इस्तेमाल पाइप (Conduit) के अंदर, ट्रेंच में या इनडोर वायरिंग में किया जाता है।

​3. फायर सेफ्टी और शीथ (Fire Safety Properties) के आधार पर


​सुरक्षा और एनवायरनमेंट के हिसाब से केबल के आउटर शीथ के प्रकार:

  • FR (Flame Retardant): यह आग को फैलने से रोकती है।
  • FRLS / FRLSH (Flame Retardant Low Smoke Zero Halogen): आग लगने की स्थिति में यह केबल बहुत कम धुँआ बनाती है और जहरीली गैसें नहीं छोड़ती।
  • LSZH (Zero Halogen Flame Retardant): इसमें हैलोजन गैस बिल्कुल नहीं होती, जो बंद इमारतों और कॉमर्शियल स्पेस के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती है।

​4. कंडक्टर की बनावट (Flexibility) के आधार पर

  • Solid Conductor: इसमें एक ही मोटा तार होता है जो केवल छोटे साइज में आता है।
  • Stranded Conductor (Class 2): पतले तारों को आपस में ऐंठकर (twist करके) बनाया जाता है, जो फिक्स्ड लेइंग और स्टैंडर्ड अंडरग्राउंड केबलिंग के लिए सही रहता है।
  • Flexible Conductor (Class 5): इसमें बहुत पतले कॉपर के ढेर सारे तार होते हैं, जिससे केबल लचीली होती है और इन्वर्टर या कंट्रोल पैनल कनेक्शन में आसानी से मुड़ जाती है।

​सही AC केबल चुनना क्यों ज़रूरी है?

​घर का लोड और इंडस्ट्री का एनवायरनमेंट दोनों बिल्कुल अलग होते हैं। बिना सोचे-समझे गलत इंसुलेशन या बिना आर्मरिंग वाली केबल लगाने से केबल समय से पहले खराब हो सकती है। अपने लोड, दूरी और साइट की परिस्थितियों के अनुसार ही सही केबल का चयन करें।

​इलेक्ट्रिकल और सोलर सिस्टम की ऐसी ही व्यावहारिक और तकनीकी जानकारी के लिए सोलर चर्चा विद कृष्णा से जुड़े रहें!

Er. krishankant 

आपका सौरदीक्षक

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